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आखिर ग्रामीण इतने नाराज क्यों हो गए; पहले स्कूल पर ताला जड़ा, फिर अधिकारी को सुनाई खरी-खोटी

सीकर जिले में श्रीमाधोपुर के भूदी की ढाणी की राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय का मामला

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आखिर ग्रामीण इतने नाराज क्यों हो गए; पहले स्कूल पर ताला जड़ा, फिर अधिकारी को सुनाई खरी-खोटी

जयपुर

अभिभावक बच्चों को स्कूल इसलिए भेजते हैं ताकि उनका भविष्य संवर सके, लेकिन सीकर जिले के श्रीमाधोपुर में गांव ढाल्यावास की भूदी की ढाणी की राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में ऐसा नहीं हो रहा है। ग्रामीणों को यह तक कहने को मजबूर होना पड़ रहा है कि उनके बच्चों का भविष्य अंधकार में है। मौके पर पहुंचे पीईईओ सुरेश कुमार ने ग्रामीणों से समझाइश का प्रयास किया लेकिन ग्रामीणों ने उनकी भी नहीं सुनी और उन्हें भी जमकर खरी-खोटी सुनाई। बाद में पीईईओ ने अस्थाई रूप से विद्यालय में दो शिक्षक लगाने का आश्वासन दिया और पांच दिन में स्थाई समाधान करने की बात कही। इसके बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ और ताला खोल दिया।

न एसडीओ से सुनी, न मंत्री कर रहे कार्रवाई

दरअसल, सीकर जिले के श्रीमाधोपुर में गांव ढाल्यावास की भूदी की ढाणी की राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों की कमी चल रही है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई अच्छे से नहीं होने के कारण कई बच्चे टीसी कटवा चुके हैं। ऐसे में शिक्षकों की कमी के कारण दर्जनों ग्रामीणों ने विद्यालय खुलने से पूर्व ही विद्यालय के प्रवेश द्वार पर ताला जड़ दिया और जमकर विरोध-प्रदर्शन किया। गुस्साए ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में शिक्षकों की कमी के चलते उनके बच्चों का भविष्य अंधकार में हैं। ग्रामीण गणपतराम व धनाराम ने बताया कि विद्यालय में वर्तमान में दो ही शिक्षक कार्यरत हैं। ग्रामीणों ने विद्यालय में अन्य शिक्षकों को लगाने की मांग को लेकर पूर्व में कई बार चिकित्सा मंत्री बंशीधर बाजिया व उपखंड अधिकारी से गुहार लगा चुके हैं। बावजूद इसके अभी तक विद्यालय में शिक्षक नहीं लगाए गए जिससे ग्रामीणों रोष है।

यहां से आते हैं छात्र-छात्राएं

ढाणी सामोता वाली, तिवाड़ी की ढाणी, नाडी, तारा वाली, नोरंगपुरा, टीलावाली।

म्हरा टाबरां की जिंदगी खराब होई री छ

ग्रामीणों का कहना है कि आठवीं तक स्कूल है लेकिन अध्यापक मात्र दो ही हैं जिससे बच्चों की पढ़ाई चौपट हो गई। वहीं ग्रामीण मनकोरी देवी, ग्यारसी देवी, परमेश्वरी देवी, संतोष देवी, मोहनी देवी, किरण देवी, संजया देवी, माया, मिश्री देवी आदि ने घुंघट की ओट में पीईईओ की गाड़ी को घेरकर बोली, 'साहब म्हतो कोना पढ्या जणां म्हान ऐ दिन देखना पढऱ्या छ म्हारी जिंदगी खराब हो री छ अब म्हरा टाबरां को गैलो थे ही कर जाओ।'


हमने घर-घर जाकर अभिभावकों से मिलकर आग्रह किया कि बच्चों सरकारी स्कूल में ही पढ़ाओ। अच्छी पढ़ाई के साथ अच्छा परिणाम भी देंगे। अभिभावकों ने बच्चों को विद्यालय में दाखिला भी करवाया लेकिन अध्यापकों की कमी के कारण पढ़ाना मुश्किल हो गया है। - कमलेश पारीक, कार्यवाहक प्रधानाध्यापक