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राजस्थान में भी हो चुका बड़ा सियासी ड्रामा, उस समय भाजपा के संकटमोचक बने थे दिग्विजय सिंह

Maharashtra Govt Formation: राजनीति ने फिर अपना रंग दिखाया है। शिवसेना, एनसीपी, कांग्रेस देखती रह गईं और भाजपा मुख्यमंत्री की कुर्सी ले उड़ी।

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जयपुर। Maharashtra govt Formation: राजनीति ने फिर अपना रंग दिखाया है। शिवसेना , एनसीपी, कांग्रेस देखती रह गईं और भाजपा मुख्यमंत्री की कुर्सी ले उड़ी। भाजपा के देवेंद्र फडणवीस ( Devendra Fadnavis ) ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और एनसीपी के अजित पवार ( Ajit Pawar ) ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ( Uddhav Thackeray ) के मुख्यमंत्री बनने का सपना टूट गया।

राजस्थान की राजनीति में भी एक बड़ा सियासी ड्रामा हो चुका है। उस समय राजस्थान के पूर्व गृहमंत्री रहे दिग्विजय सिंह ने भैरोसिंह सिंह शेखावत सरकार बचाई थी। बात 1990 की है। जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा को बिहार में रोककर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। इसकी तीखी प्रतिक्रिया में भाजपा ने केंद्र में वीपी सिंह की सरकार से समर्थन वापस ले लिया था।

नतीजतन वीपी सिंह सरकार अल्प मत में आ गई। इसका प्रभाव ये पड़ा कि राजस्थान में भैरोसिंह शेखावत की भाजपा-जनता दल गठबंधन सरकार को गिराने के लिए जनता दल के सदस्यों को भी वही खेल खेलने को कहा गया। इस पर राजस्थान में जनता दल दो धड़ों में बंट गया। एक धड़ा ऐसा करने को तैयार था, जबकि दूसरा धड़ा शेखावत सरकार के साथ रहने पर अड़ा रहा। इधर भैरोंसिंह शेखावत सरकार की गणित तब बिगड़ गई जब मंत्रिमंडल के 11 सदस्यों ने एक साथ अपने त्यागपत्र सौंप दिए। ऐसे में सरकार गिरने का खतरा मंडराने लगा। भैरोंसिंह सरकार के इस बुरे वक्त में साथ दिया जनता दल के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने। दिग्विजय सिंह ने मूल जनता दल से बगावत करते हुए अपना एक अलग खड़ा करने का फैसला ले लिया। इस नए राजनीतिक संगठन को नाम मिला जनता दल (दिग्विजय सिंह) । तब इसी दिग्विजय धड़े ने शेखावत सरकार का साथ दिया। इससे सरकार गिरने से बच गई।

Maharashtra politics Latest update: वैसे राजनीति में मौका परस्ती आम बात है, जिसे जहां अपना फायदा नजर आता है। वह उसकी नाव में सवार हो जाता है। मालूम हो कि पिछला विधानसभा चुनाव महाराष्ट्र में दो गठबंधनों के बीच हुआ था। एक गठबंधन के मुख्य दल भाजपा और शिवसेना थे तो दूसरे गठबंधन के मुख्य दल कांग्रेस-एनसीपी, जिसमें भाजपा को सर्वाधिक 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली थी। चुनाव परिणाम आने के बाद शिवसेना की ओर से ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद की मांग करने के कारण भाजपा के साथ उसका गठबंधन टूट गया। शिवसेना नेता चुनाव के पहले से ही यह दावा करते रहे हैं कि वह महाराष्ट्र में अपना मुख्यमंत्री बनाकर शिवसेना संस्थापक बालासाहब ठाकरे के सपनों को पूरा करेंगे। हालांकि, इसे लेकर शिवसेना ने कांग्रेस-एनसीपी के सहयोग से महाराष्ट्र में सरकार बनाना चाहा, लेकिन भाजपा ने एक बड़ा उलटफेर करते हुए महाराष्ट्र में एनसीपी प्रमुख शरद पवार ( Sharad Pawar ) के भतीजे अजित पवार को लेकर सरकार बना ली।