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JJM Scam: शादी की सालगिरह पर गिरफ्तारी, चौंका रहा पूर्व मंत्री डॉ महेश जोशी के अरेस्ट का ‘अजीब संयोग’

Rajasthan Politics : महेश जोशी की गिरफ्तारी और उससे जुड़ी तारीखों का यह जाल किसी फिल्मी पटकथा जैसा लग रहा है। 'जल जीवन मिशन' घोटाले की आंच और व्यक्तिगत जीवन की त्रासदी के बीच यह खबर चर्चा में है।

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Dr Mahesh Joshi

Dr Mahesh Joshi

पूर्व मंत्री डॉ महेश जोशी के लिए 7 मई की तारीख खुशियों के बजाय दुखों का पहाड़ लेकर आई। करोड़ों रुपये के जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में उन्हें दूसरी बार गिरफ्तार किया गया। लेकिन इस गिरफ्तारी ने केवल सियासी गलियारों में ही नहीं, बल्कि आम जनता के बीच भी उन 'अजीब संयोगों' की चर्चा छेड़ दी है, जो महेश जोशी के राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन को एक ही तारीख पर जोड़ रहे हैं।

कभी मांगा था वोट, आज मिली चोट

7 मई को डॉ महेश जोशी की शादी की सालगिरह होती है। लेकिन नियति का खेल देखिए, ठीक इसी तारीख का इतिहास जोशी के लिए बेहद खास और अब बेहद दर्दनाक रहा है।

  • 2009 का वो विज्ञापन: साल 2009 के लोकसभा चुनाव में जब जयपुर सीट पर मतदान था, तब डॉ जोशी कांग्रेस के उम्मीदवार थे। उस दिन भी उनकी शादी की सालगिरह थी। उन्होंने अखबारों में पूरे पन्ने का विज्ञापन देकर जयपुर की जनता से 'शादी की सालगिरह के उपहार' के रूप में वोट माँगा था।
  • 2026 की ये गिरफ्तारी: वर्षों बाद आज उसी तारीख पर उनकी गिरफ़्तारी हुई है।

पिछली गिरफ्तारी और पत्नी का दुखद अंत

डॉ महेश जोशी ने गिरफ्तारी के वक्त जो बयान दिया, उसने सबको भावुक कर दिया। उन्होंने अपनी स्वर्गीय पत्नी का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसा लगता है मानो उन्हें (पत्नी को) इसी तरह श्रद्धांजलि दी जा रही हो।

  • त्रासदी का फ्लैशबैक: जब डॉ जोशी को पहली बार गिरफ्तार किया गया था, तब उनकी पत्नी की तबीयत बेहद गंभीर थी। गिरफ्तारी के कुछ समय बाद ही उनका निधन हो गया।
  • भावुक प्रतिक्रिया: जोशी ने भारी मन से कहा, "अगर मुझ पर एक भी आरोप साबित हो जाए, तो मुझे किसी सजा की जरूरत नहीं पड़ेगी, मैं खुद अपना फैसला कर लूंगा।" उन्होंने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए इसे राजनीतिक विद्वेष करार दिया।

क्या है जल जीवन मिशन घोटाला?

यह पूरा मामला राजस्थान में घर-घर पानी पहुँचाने वाली 'जल जीवन मिशन' योजना से जुड़ा है।

घोटाले की जड़: आरोप है कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान इस मिशन में फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर ठेके दिए गए और घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ।

करोड़ों का हेरफेर: प्रवर्तन निदेशालय (ED) और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) इस मामले में करोड़ों रुपये के लेन-देन की जांच कर रहे हैं।

एजेंसियों का शिकंजा: महेश जोशी के करीबियों और विभाग के उच्च अधिकारियों पर पहले ही गाज गिर चुकी है, और अब जोशी की दोबारा गिरफ्तारी ने मामले की गंभीरता बढ़ा दी है।

राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट

महेश जोशी की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस इसे 'बदले की राजनीति' बता रही है, वहीं भाजपा का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत एजेंसियां अपना काम कर रही हैं।

लेकिन जिस तरह से जोशी ने अपनी सालगिरह और पत्नी के निधन को इस घटना से जोड़ा है, उससे सोशल मीडिया पर एक बड़ा धड़ा उनके प्रति सहानुभूति भी जता रहा है।