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Rajasthan News: फसल बीमा योजना में बड़ा खेल! क्लेम करते ही सच आया सामने, किसानों के उड़े होश

Rajasthan Crop Insurance: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को राहत देने का दावा करने वाली व्यवस्था में जयपुर जिले के गांवों में बड़ा खेल सामने आया है।

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Rajasthan Crop Insurance

पत्रिका फाइल फोटो

PM Fasal Bima Yojana: जयपुर। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को राहत देने का दावा करने वाली व्यवस्था में जयपुर जिले के चाकसू क्षेत्र के कादेड़ा सहित आसपास के गांवों में बड़ा खेल सामने आया है। किसानों ने खेतों में गेहूं और चने की फसल की बुवाई की थी, जबकि फसल बीमा में उनके खेतों में रिकॉर्ड में सरसों का बीमा दर्ज कर दिया गया।

ओलावृष्टि और तेज तूफान से फसल खराब होने के बाद जब किसानों ने क्लेम के लिए आवेदन किया तो सच्चाई सामने आते ही उनके होश उड़ गए। किसानों का कहना है कि उन्होंने सहकारी समिति के माध्यम से फसली ऋण लिया था, जिसके साथ ही प्रीमियम काटकर बीमा भी कर दिया गया था। प्रीमियम कटने के बाद किसान इस भरोसे में थे कि आपदा की स्थिति में उन्हें योजना के तहत मुआवजा मिलेगा, लेकिन क्लेम के समय पता चला कि उनकी वास्तविक फसल का बीमा ही नहीं हुआ है।

क्षेत्र में हाल ही में हुई ओलावृष्टि और तेज आंधी से गेहूं व चने की फसल को भारी नुकसान हुआ। इसके बाद किसानों ने नियमानुसार क्लेम प्रक्रिया शुरू की, लेकिन बीमा रिकॉर्ड में फसल का विवरण अलग मिलने से उन्हें राहत की बजाय निराशा हाथ लगी। किसानों का कहना है कि यह केवल एक-दो मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई किसानों के साथ ऐसी ही गड़बड़ी सामने आई है। इससे वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे है।

सहकारी समिति से लिया था ऋण

योजना के तहत सहकारी समितियों के माध्यम से ऋण वितरण के साथ ही बीमा प्रीमियम काट लिया जाता है। खरीफ फसलों के लिए 2 प्रतिशत और रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत प्रीमियम लिया जाता है, जबकि व्यावसायिक व बागवानी फसलों के लिए यह दर 5 प्रतिशत तक होती है। बीमा का उद्देश्य सूखा, ओलावृष्टि, पाला, तेज हवा, बीमारी और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से किसानों को आर्थिक सुरक्षा देना है, लेकिन वर्तमान स्थिति में व्यवस्था पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।

ऐसे खुली पोल

किसानों ने बताया कि उन्होंने समय पर बीमा करवाया और 72 घंटे के भीतर नुकसान की सूचना भी दी, लेकिन गलत फसल दर्ज होने के कारण उन्हें क्लेम मिलने की उम्मीद खत्म होती नजर आ रही है। इससे किसानों में भारी रोष है और वे जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

यह है प्रक्रिया

-फसली ऋण के साथ ही सहकारी समितियों द्वारा प्रीमियम काटकर बीमा किया जाता है।
-नुकसान के बाद सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर डीबीटी के जरिए राशि सीधे खाते में दी जाती है।
-फसल खराब होने की सूचना 72 घंटे में देना जरूरी है।
-मुआवजा फसल नुकसान के प्रतिशत व बीमित क्षेत्र के आधार पर तय होता है, जो प्रति हैक्टेयर 75 हजार से 1 लाख रुपए से अधिक तक हो सकता है।

किसानों का दर्द

कादेड़ा निवासी किसान अशोक खण्डेलवाल ने बताया कि उनके खेत में गेहूं की फसल की पैदावार है, लेकिन बीमा सरसों का कर दिया गया। क्लेम के समय यह सामने आने पर वह हैरान है। भागीरथ रेगर, मोहनलाल, शंकर सिंह, दामोदर, किशोर सहित कई किसानों ने पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई तो किसानों को गेहूं फसल के बजाय सरसों की फसल का बीमा बताया गया। जिससे किसान अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहा है।

इनका कहना है

कृषि सहकारी समिति चाकसू के चेयरमैन ने कहा कि यदि फसल बीमा में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो मामले को उच्च अधिकारियों और कृषि मंत्री के समक्ष उठाया जाएगा तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-मदन चौधरी, चेयरमैन क्रय विक्रय सहकारी समिति चाकसू।

किसान को बीमा के लिए अपनी फसल की जानकारी देना आवश्यक होता है। यदि किसान जानकारी नहीं देता तो समिति अपने स्तर पर फसल का चयन कर सकती है।
-शंकर सिंह, ऋण पर्यवेक्षक

पूर्व सहकारी समिति अध्यक्ष ने इसे किसानों के साथ छलावा बताते हुए कहा कि इससे किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक पीड़ा भी झेलनी पड़ रही है।
-हिम्मत सिंह, पूर्व चेयरमैन, क्रय विक्रय सहकारी समिति।