
कोविड—19 की भरपूर बंदिशे झेलने के बाद हर उत्सव के लिए पहले से ज्यादा जोश देखने को मिल रहा है। यही उमंग अब मकर सक्रांति के लिए देखने को मिल रही है। पतंग—डोर से बाजार गुलजार है। वहीं कोविड के चलते दो साल से बेकार बैठे पतंगसाज भी अब दूने जोश के साथ पतंगे बनाने में जुटे हैं। जयपुर में उत्तर प्रदेश के कई कारीगरों ने मकर सक्रांति से करीब दो माह पहले से डेरा डाल लिया है और मांग की आपूर्ति करने के लिए 14—14 घंटे जमकर काम कर रहे हैं।
पतंगों के लिए मशहूर जयपुर के हांडीपुरा इलाके में उत्तर प्रदेश के कई पतंगसाज बांस की छड़ें, धागे और कागज सहित कच्चा माल लेकर आ चुके हैं और अच्छी पतंगों का ऑर्डर पूरा करने के लिए रात—दिन जुटे हुए हैं। हांडीपुरा सहित हल्दियों का रास्ता, किशनपोल बाजार सहित कई इलाकों में पतंगों के बाजार सजे हुए हैं। इस बार मकर सक्रांति वीकेंड पर आ रही है, ऐसे में पतंग उड़ाने के लिए शनिवार और रविवार को भी लोग छतों पर टंगे रहेंगे।
यह भी पढ़ें:
अब पतंगे नहीं कारीगर आ रहे:
जयपुर के पतंग कारोबारी, उत्तर प्रदेश के बरेली और सहारनपुर से पतंगें मंगवाने की बजाय कारीगरों को बुलाकर यहीं पतंगे तैयार करवा रहे हैं। पहले उत्तर प्रदेश से पतंग लाने पर कोहरे और पाले के कारण बड़ी संख्या में पतंगें खराब हो जाती थीं। जोखिम कवर करने का कोई रास्ता नहीं था। ऐसे में पिछले कुछ सालों से कारीगरों को ही बुलवा कर पतंग तैयार करवा ली जाती है या पतंग निर्माता खुद यहां आकर पतंग बनाते और बेचते हैं।
यह भी पढ़ें:
'चाइनीज मांझे' से रखें परहेज:
ग्लास कोटेड नायलोन का धागा टूटता नहीं है, इसलिए खतरनाक है। ऐसे चाइनीज के मांझे के खरीद—बेचान पर रोक के बावजूद यह कोड नेम से बिक रहा है। पतंग उड़ाने में इस मांझे का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे मांझे से राहगीरों की गर्दन कटने सहित उड़ाने वालों की अंगुलियां कटने के कई मामले सामने आ रहे हैं। सूती धागे से बना मांझा खतरनाक नहीं हो सकता क्योंकि कहीं अटकने पर टूट जाता है।
Published on:
11 Jan 2023 11:45 am
