
आनंद मणि त्रिपाठी / जयपुर। Manipur Attack: पूर्वोत्तर में घात लगाकर हमला करने का इतिहास नया नहीं है लेकिन यह पहली बार हुआ है कि किसी कमांडिग अधिकारी को परिवार सहित को निशाना बनाया गया। सबसे बडी जानकारी यह आ रही है कि 15 आतंकियों ने पूरी योजना बनाकर यह हमला किया था। इससे पहले 20 दिसंबर 1993 में कर्नल नीलकंठ जयचंद्रन नायर (NJ) पर 100 से अधिक नागा उग्रवादियों ने घात लगाकर हमला किया था। इसमें वह सिपाहियों को बचाते हुए शहीद हो गए। कर्नल नीलकंठ उस समय तक भारतीय सेना के सबसे ज्यादा वीरता निशान से सम्मानित होने वाले अधिकारी थे। वह एकमात्र अधिकारी थे जिन्होंने अशोक चक्र और कीर्ति चक्र दोनों प्राप्त किया।
महीनों से थी हमले की तैयारी
इस हमले में जिस उग्रवादी संगठन मणिपुर नागा पीपुल्स फ्रंट MNPFऔर पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी PLA ने इस हमले की जिम्मेंदारी ली है। उसके साजिश के तार लंबे दिखाई दे रहे हैं। मणिपुर पुलिस ने 22 सितंबर को पश्चिमी इंफाल जिले से नौरोबम जयशंकर नाम के उग्रवादी को कई किलो आईईडी के साथ गिरफतार किया था। इसके अलावा 250 किलो आईईडी 9 नवंबर को ही पकडी थी। इसे 250 ग्राम से लेकर 5 किलो के पैक तैयार कर कोरटैक्स वायर और बैट्री के साथ पैक किया गया था। अब आईईडी से हुआ हमला साजिश के गहरे नेटवर्क की तरफ इशारा कर रहा है।
सीजफायर में उग्रवादी बढा रहे ताकत
सुरक्षा विशेषज्ञों की माने तो पूर्वोत्तर में उग्रवादी संगठनों ने पाकिस्तान की रणनीति अपना रहे हैं। सरकार से एक तरफ सीजफायर वार्ता कर रहे हैं तो दूसरी तरफ अपनी ताकत बढाने लगे। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मंगलवार को दो राष्ट्रीय किक बॉक्सर के उल्फा—आई से जुडने की रिपोर्ट आ रही है। यह उग्रवादी संगठन में शामिल होने वाले पांच युवाओं के साथ देखी गई हैं। असम पुलिस के डीआईजी जीतमल डोले की माने तो इनके गायब होने की रिपोर्ट दर्ज है। इनकी तलाश जारी है।
Updated on:
14 Nov 2021 05:51 pm
Published on:
14 Nov 2021 05:39 pm
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