अरुणाचल प्रदेश से आतंकियों का सफाया करने के लिए मेजर आलोक माथुर को बेहद अहम जिम्मेदारी दी गई थी। सर्च अभियान के दौरान सात अक्टूबर, 2003 को कामेंग में इनका आठ आतंकवादियों से सामना हुआ। जमीन में बारुदी सुरंगों बिछी होने के बाद भी मेजर आलोक ने दुश्मन को ललकारा। मुठभेड़ के दौरान उनकी दाईं बाजू में गोली लगने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और दुगुने जोश के साथ दुश्मनों पर गोलियों की बौछार करते रहे।