
उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में प्रसिद्ध गौरक्षक साधु चंद्रशेखर उर्फ 'फरसा वाले बाबा' की मौत के बाद भारी बवाल खड़ा हो गया है। इस घटना में राजस्थान पंजीकरण संख्या वाले एक ट्रक के शामिल होने और गोवंश तस्करी की अफवाह ने उग्र भीड़ को सड़कों पर उतार दिया। हालांकि, मथुरा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह कोई हत्या या तस्करी का मामला नहीं, बल्कि कोहरे के कारण हुआ एक दर्दनाक हादसा था।
पुलिस के अनुसार घटना के समय मथुरा हाईवे पर घना कोहरा छाया हुआ था। जानकारी के अनुसार, गौरक्षक बाबा चंद्रशेखर ने गोवंश तस्करी के संदेह में नागालैंड नंबर के एक ट्रक को रुकवाया था।
हादसे में राजस्थान नंबर के ट्रक का नाम आते ही भरतपुर और अलवर जैसे सीमावर्ती जिलों में भी चर्चाएं तेज हो गईं। मथुरा में बाबा की मौत की खबर फैलते ही भीड़ उग्र हो गई।
मथुरा पुलिस ने स्पष्ट तौर पर उन अफवाहों का खंडन किया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि बाबा को गोतस्करों ने जानबूझकर कुचला है। एसएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि दोनों ट्रकों (नागालैंड और राजस्थान नंबर) में से किसी में भी गोवंश नहीं था। एक में किराने का सामान (ग्रोसरी) था और दूसरे में तार लदे हुए थे। यह पूरी तरह से एक दुर्घटना है जो खराब मौसम और गलतफहमी के कारण हुई।
हादसे में राजस्थान के ट्रक की संलिप्तता को देखते हुए भरतपुर और मथुरा बॉर्डर पर पुलिस ने सतर्कता बढ़ा दी है। चूंकि 'फरसा वाले बाबा' के अनुयायी राजस्थान के मेवात और ब्रज क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में हैं, इसलिए अफवाहों को रोकने के लिए दोनों राज्यों की पुलिस आपसी समन्वय बनाए हुए है।
मथुरा पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही भ्रामक खबरों पर विश्वास न करें। यह मामला गोतस्करी से जुड़ा नहीं है। राजस्थान नंबर के ट्रक ड्राइवर से भी पूछताछ की जा रही है ताकि हादसे के तकनीकी कारणों का पता लगाया जा सके।
Updated on:
21 Mar 2026 03:02 pm
Published on:
21 Mar 2026 02:55 pm
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