5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

गंगा जमुनी तहजीब का संगम बना मौलाना साहब का उर्स, सभी धर्मों के लोग हुए शरीक

https://www.patrika.com/rajasthan-news/
2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Rajesh

Aug 09, 2018

dargah maulana sahab

जयपुर।
हजरत मौलाना जियाउद्दीन साहब का सालाना 209वां पांच दिवसीय उर्स कुल की रस्म के साथ बुधवार को संपन्न हो गया। उर्स में शहर के लोगों के अलावा अन्य शहरों के लोगों ने भी यहां आकर उर्स के पांच दिनों तक सभी कार्यक्रमों में शिरकत की। उर्स के अंतिम दिन सुबह कुरआन ख्वानी हुई साथ ही आस्ताना ए आलिया को इत्र और केवड़े से गुस्ल दिया गया। असर की नमाज के बाद कव्वालों ने हम्द ओ नात पेश कीं और फातेहा ख्वानी हुई। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के अलग अलग जिलों से अकीदत मंदों ने दरगाह पर खिराज ए अकीदत पेश की। ये जायरीन यहां से आगे अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर भी जाते हैं। उर्स पर सभी धर्मों के लोग बड़े ही सौहार्दता के साथ आते हैं और गुलाबी शहर की गंगा जमुनी तहजीब का सरमाया बन जाते हैं।

अमन,शांति और खुशहाली के लिए हुई दुआऐं
दरगाह मौलाना साहब के सज्जादानशीन महमूद मिंया,नायब सज्जादानशीन बादशाह मिंया के अलावा दिल्ली की मशहूर दरगाह हजरत निजामुद्दीन ओलिया के पीरजादा ख्वाजा शरीफ निजामी व पीरजादा खुर्शीद निजामी ने कुल की रस्म के दौरान अमन शांति की दुआ मांगी।

सभी धर्मों के लोग हुए शरीक
खुसरो मिंया ने बताया कि मौलाना जियाउद्दीन साहब की दरगाह पर प्रतिदिन सैंकड़ो की संख्या में हर धर्म के लोग आते हैं। यहां पर आने वाले लोगों को इस आस्ताने पर आकर बहुत सुकून मिलता है। इस आस्ताने पर आने वाला हर इंसान की हजरत मौलाना जियाउद्दीन में गहरी आस्था हैं। विभिन्न धर्मों के लोग अपने इष्ट की आराधना करने के साथ ही इस दरगाह की चौखट पर अपना सिर नवाते हैं और उर्स के दौरान कई लोग अपनी मन्नत पूरी होने पर यहां आकर मन्नत उतारते हैं। इस बार भी उर्स में हर मजहब के लोगों ने पांच दिन तक शिरकत की है।

ढोल-ताशों के साथ आते हैं
मौलाना जियाउद्दीन साहब की दरगाह पर चादर पेश करने के लिए अकीदत मंदसैंकड़ों की तादाद में आते हैं। ढोल-ताशों और आतिशबाजी के बीच अकीदत मंद चादर पेश करने के लिए आते हैं। यहां से पेश हुईं चादरें पांच दिन चलने वाले उर्स के दौरान अजमेर की ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह सहित शहर के खुमरान, मछलीवालान, पन्नीगरान, नीलगरान, शोरगरान, नालबंदान आदि मोहल्लों से चादरें पेश की गईं। इसके अलावा मौलाना साहब में आस्था रखने वाले लोग भी रोजाना यहां आकर चादर पेश कर रहे थे। इनके अलावा बरेली, अजमेर, दिल्ली, कलकत्ता, टोंक, बीकानेर आदि शहरों से चादर पेश करने वाले रोजाना यहां आ रहे थे। उर्स के दौरान लंगर में काफी तादाद में जायरीनों ने हिस्सा लिया।