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मावठ ने धोया काला सोना

जिले में पिछले दो-तीन दिन से मौसम में आए बदलाव के बाद रविवार को हुई बारिश ने अफीम की फसल को गर्त में डाल दिया है। जिन किसानों ने डोडों के चीरे लगा दिए हैं, उनमें निकलने वाले मादक दूध को बारिश के पानी ने बहा दिया है। मौसम में नमी के चलते अब किसानों पर दोहरी मार पडऩे वाली है। पहली प्रकृति की और दूसरी फफूंदजनित रोग काली मस्सी की।

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Moti ram

Mar 02, 2015

जिले में पिछले दो-तीन दिन से मौसम में आए बदलाव के बाद रविवार को हुई बारिश ने अफीम की फसल को गर्त में डाल दिया है। जिन किसानों ने डोडों के चीरे लगा दिए हैं, उनमें निकलने वाले मादक दूध को बारिश के पानी ने बहा दिया है। मौसम में नमी के चलते अब किसानों पर दोहरी मार पडऩे वाली है। पहली प्रकृति की और दूसरी फफूंदजनित रोग काली मस्सी की।

चित्तौडग़ढ़ सहित जिले के कपासन, केसरखेड़ी, भदेसर, भादसोड़ा, बड़ीसादड़ी, गंगरार, बेगूं, सहित जिले के विभिन्न इलाकों में बोई गई अफीम की फसल में अधिकांश जगह चीरे लग चुके हैं। किसानों को आस थी कि इस बार अफीम की अच्छी पैदावार होगी, लेकिन तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने चीरे लगे डोडों का दूध धो डाला, वहीं तेज हवा से कई डोडे और पौधे धराशायी हो गए।

डोडों के चीरे लगाने के बाद उसमें से दूध जैसा द्रव्य निकलता है, इसे काश्तकार बर्तन में एकत्रित करते हैं। बाद में इसका रंग काला हो जाता है, जो अफीम कहलाता है। रविवार को हुई बारिश के पानी से चीरे लगे डोडों का दूध भी 'फुर्रÓ हो गया है। जिले में बारिश के चलते मौसम में आई नमी के चलते अब अफीम की फसल में डाउनी मिल्ड्यू यानी काली मस्सी का प्रकोप बढऩे की आशंका है। यदि दो दिन में मौसम साफ नहीं होता है तो काली मस्सी के कारण डोडे सडऩे शुरू हो जाएंगे और इससे किसानों पर दोहरी मार पड़ेगी।

नहीं लग पाए चीरे
बारिश होने के कारण रविवार को जिले में अधिकांश खेतों पर काश्तकार डोडों के चीरे नहीं लगा पाए। इससे भी किसानों को नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि इससे पैदावार में भारी कमी आने की आशंका है। क्यों कि चीरे लगे डोडों में पानी घुस चुका है और अब उनमें दूध कम पड़ जाएगा। पूरी पैदावार लेने के लिए अमूमन तीन से पांच बार तक डोडों के चीरे लगाए जाते हैं। जिन किसानों ने एक बार चीरे लगा दिए हैं, वे अब मौसम को देखते हुए अगला चीरा लगाने में विलंब करेंगे, ऐसे में भी डोडों का दूध सूख जाएगा।

गेहूं, ईसबगोल, सरसों में भी नुकसान
जिले में तेज हवाओं के साथ रविवार को हुई बारिश से कई जगह गेहूं की फसल धराशायी हो गई है, इससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा जिन किसानों के यहां सरसों की फसल कट चुकी है और इसके खेतों पर ढेर लगे हुए हैं, वहां भी फसल पानी से भीगने के कारण सरसों में नुकसान हुआ है। डूंगला, रावतभाटा, निकुंभ और बड़ीसादड़ी क्षेत्र में जहां ईसबगोल की फसल पकने के कगार पर है, वहां इस फसल में 25 से 40 प्रतिशत नुकसान होने की आशंका है।

सौंपेंगे रिपोर्ट
कपासन क्षेत्र के केसरीखेड़ी गांव में कई किसानों के यहां अफीम की फसल का अवलोकन किया है। बारिश के कारण फसल में नुकसान हुआ है। कई जगह गेहूं की फसल गिर गई है, वहां भी नुकसान हुआ है। इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट विभाग के उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी।
रामजस खटीक, सहायक निदेशक, कृषि विस्तार, कपासन

खेतों पर पहुंचे अधिकारी-जनप्रतिनिधि
अफीम की फसल में बारिश से हुए नुकसान की सूचना के बाद कृषि विभाग से सहायक निदेशक कपासन रामजस खटीक, सहायक निदेशक चित्तौडग़ढ़ शंकरलाल जाट, लोकसभा युवक कांग्रेस अध्यक्ष आनन्दीराम खटीक, गोराजी का निम्बाहेड़ा ग्राम पंचायत सरपंच बालूराम चित्तौडिय़ा, पूर्व पंचायत समिति सदस्य शंकरलाल जाट आदि कपासन क्षेत्र के केसरखेड़ी गांव पहुंचे।

यहां अफीम पट्टेदार किसान छागनलाल, लम्बरदार अमचन्द जाट, किशनलाल, धापूबाई, गोपीलाल, हुड़ीबाई, वेणीराम, माधु, लम्बरदार भैरूलाल जाट आदि के खेतों का अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने अवलोकन किया। यहां किसानों ने बताया कि केसरखेड़ी में अफीम के करीब 96 पट्टे हैं। बारिश से अफीम की फसल आड़ी पड़ गई है। डोडे टूट गए हैं और डोडों का दूध भी बारिश के पानी के साथ बह गया है।

चीरे लगे डोडे पानी का प्रवेश होने से ढिल्ले पड़ गए हैं। इधर, लोकसभा युवक कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर रविवार को जिले में बारिश से अफीम, सरसों, गेहूं और इसबगोल की फसल को हुए नुकसान का सर्वे करवाकर प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग की है। इसके अलावा कई जगह गेहूं की फसल धराशायी हो गई है और खेतों में कटी पड़ी सरसों को भी नुकसान पहुंचा है।