
पीएम से मुलाकात के दौरान राजस्थान के दोनों खिलाड़ी। सर्कल में
अरविंद पालावत/जयपुर। एक ओर जहां सरकार खेलों को बढ़ावा देने की बात कहती है तो वहीं दूसरी ओर खिलाड़ियों की बेकद्री के मामले भी लगातार सामने आते रहे हैं। लेकिन, इस बार ये बेकद्री उन खिलाड़ियों के साथ हुई है जो ना तो बोल सकते हैं और ना ही सुन सकते है। इसके बावजूद उन्होंने डेफलंपिक्स में परचम लहराकर देश और राजस्थान का नाम ब्राजील में रोशन किया है। जी हां, हम बात कर रहे हैं ब्राजील डेफलंपिक्स में बेहतर प्रदर्शन कर मेडल जितने वाले खिलाड़ियों की।
दरअसल, ब्राजील में 1 से 15 मई के बीच डेफलिंपिक यानी मूक बधिरों का ओलंपिक आयोजित हुआ था। इसमें राजस्थान के कई खिलाड़ी चमके, लेकिन सरकार की ओर से नकद पुरस्कार तो दूर हौंसला अफजाई भी नहीं की गई। जबकि अन्य राज्यों ने जमकर नकद पुरस्कार दिए। खुद प्रधानमंत्री मोदी ने ब्राजील से लौटने के बाद इन खिलाड़ियों से मुलाकात की। गौरतलब है कि पैरालंपिक में पदक जीतने पर अवनी लेखरा और देवेंद्र झांझड़िया को सरकार ने बड़ा सम्मान दिया और नकद धनराशि भी दी थी।
जयपुर के अभिनव ने जीते तीन मेडल, सीएम से भी मिले
ब्राजील में हुए डेफलंपिक्स में जयपुर के डेफ शटलर अभिनव शर्मा ने बैडमिंटन में दो स्वर्ण और एक कांस्य पदक जीता। जब वे जयपुर गुलाबी नगरी पहुंचे तो खेलप्रेमियों ने तो उनका स्वागत किया, लेकिन सरकार की ओर से कोई सम्मान नहीं मिला। हालांकि जयपुर जिला बैडमिंटन संघ की ओर से अभिनव को 21 हजार रुपए देने की घोषणा की गई थी। वहीं, उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से भी मुलाकात की थी। इस दौरान भी मुख्यमंत्री ने किसी तरह की सम्मान राशि देने की घोषणा नहीं की।
राजस्थान के इन खिलाड़ियों ने पाए पदक
नाम---------------खेल---------------पदक
अभिनव शर्मा------बैडमिंटन-----------दो गोल्ड और एक कांस्य
वेदिका शर्मा-------शूटिंग 10 मीटर------कांस्य पदक
इनका प्रदर्शन रहा बेहतर
नाम--------------- खेल---------------स्थान
अंकित-------------कुश्ती-------------चौथा
कृष्ण कुमार यादव---कुश्ती-------------सातवां
मुख्यमंत्री को भी लिखा है पत्र
मूक बधिर खिलाड़ियों के कोच जितेंद्र सिंह ने बताया कि इन खिलाड़ियों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित करने के संबंध में पत्र भी लिखा गया है। लेकिन, अभी तक इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
कई राज्य कर चुके हैं सम्मानित
जैसे ही खिलाड़ी मेडल जीतकर राज्यों में पहुंचे तो हरियाणा, मध्य प्रदेश और बिहार सरकार ने सम्मान समारोह आयोजित किया। इस मौके पर खिलाड़ियों को नकद पुरस्कार दिए गए। हरियाणा सरकार ने तो इन खिलाड़ियों को छह करोड़ रूपए के नकद पुरस्कार दिए हैं। साथ ही अन्य राज्यों की सरकारों ने भी पुरस्कार की घोषणा की है।
डेफलिंपिक के इतिहास में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
गौरतलब है कि भारत ने अपने डेफलिंपिक इतिहास का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए ब्राजील में कुल 16 पदक जीते थे, इनमें से राजस्थान के खिलाड़ियों ने चार पदक हासिल किए। लेकिन, राजस्थान के खिलाड़ियों को किसी तरह का प्रोत्साहन नहीं मिला।
यह है खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने की नीति
राजस्थान खेल नीति, 2019 के अनुसार विभिन्न स्तर की प्रतियोगिता में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धि के लिए हौसला अफजाई करने के लिए पुरस्कार के नियम बने हुए हैं। इसके तहत ओलंपिक गेम्स में स्वर्ण पदक पर तीन करोड़, रजत पदक पर दो करोड़ और कांस्य पदक पर एक करोड़ देने का प्रावधान है। जबकि एशियन और कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक हासिल करने पर एक करोड़, रजत पदक पर 60 लाख और कांस्य जितने पर 30 लाख रुपए का पुरस्कार देने का नियम है। साथ ही कई सुविधाएं भी दी जाती है। इस नीति में स्पष्ट रूप से निशक्त खिलाड़ी यानी डीफ़ का भी नाम लिखा गया है।
इनका कहना है:
राजस्थान सरकार ने दिव्यांग खिलाड़ियों की कोई सुध नहीं ली। जिससे खिलाड़ी हतोत्साहित हुए हैं। हमारी राज्य सरकार से मांग है कि अन्य ओलंपिक पदक विजेताओं की तर्ज पर इन्हें भी सम्मान दिया जाए ताकि सभी मूक बधिर बच्चों का मनोबल बढ़े।
जितेंद्र सिंह, अध्यक्ष, राजस्थान बधिर खेल परिषद
Published on:
06 Jun 2022 01:14 pm
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