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Rajasthan Politics: राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले भाजपा-कांग्रेस में छिड़ी सियासी जंग, दोनों दलों ने बनाई ये रणनीति

MNREGA vs VB-G RAM-G: प्रदेश में प्रस्तावित पंचायत चुनावों की कवायद के बीच भाजपा और कांग्रेस में मनरेगा बनाम बीवी-जीराम-जी को लेकर सियासी टकराव तेज होता दिख रहा है।

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बीजेपी-कांग्रेस। पत्रिका फाइल फोटो

जयपुर। राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। प्रदेश में प्रस्तावित पंचायत चुनावों की कवायद के बीच भाजपा और कांग्रेस में मनरेगा बनाम बीवी-जीराम-जी को लेकर सियासी टकराव तेज होता दिख रहा है।

दोनों ही दल राजस्थान में ग्रामीण वोट बैंक को साधने के लिए अलग-अलग रणनीतियों पर काम कर रहे हैं। कांग्रेस जहां मनरेगा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को चुनावी हथियार बना रही है। वहीं, भाजपा बीवी-जीराम-जी के जरिए जनता तक अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी में है।

दोनों दलों ने बताना ये प्लान

एक ओर प्रदेश कांग्रेस ने केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में मनरेगा को चुनावी मुद्दा बनाते हुए 45 दिन तक मनरेगा बचाओ अभियान चलाने की घोषणा की है। वहीं, भाजपा ने बीवी-जीराम-जी योजना के प्रचार-प्रसार के लिए जनजागरण अभियान की तैयारी शुरू कर दी है।

कांग्रेस-भाजपा का अभियान फरवरी तक चलने के संकेत

दोनों दलों के अभियान फरवरी तक चलने के संकेत हैं। इस बीच पंचायत चुनाव का सियासी शोर भी चरम पर पहुंचने की संभावना है। माना जा रहा है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव 31 मार्च से पहले कराए जाने का लक्ष्य है।

सीएम भजनलाल का कांग्रेस पर हमला

इससे पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को सीएमओ में पत्रकारों से कहा कि कांग्रेस की गलत मंशा के चलते मनरेगा के तहत किए गए अधिकांश कार्य गांवों की समग्र विकास योजनाओं से नहीं जुड़ पाए। नए वीबी-जी राम जी कानून में इन सभी कमियों को दूर किया गया है। अब सालाना रोजगार की कानूनी गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है।

जूली ने किया तीखा पलटवार

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सीएम भजनलाल शर्मा के मीडिया को दिए बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि ‘वीबी-जी-राम’ योजना ग्रामीण लोकतंत्र और मनरेगा के खिलाफ है। जिस पंचायती राज व्यवस्था से मुख्यमंत्री ने अपनी राजनीतिक पहचान बनाई, आज उसी को कमजोर करने के लिए वे केंद्र सरकार के ब्रांड एंबेसडर बने हुए हैं। जूली ने आरोप लगाया कि मनरेगा जैसी अधिकार आधारित योजना को नई व्यवस्था के जरिए खत्म करने की कोशिश की जा रही है।


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