
baby girl
जयपुर
दुनिया में तुम ही तो लाई थीं.... मेरा क्या कसूर था. मां....। दो दिन की यह बच्ची अगर बोल पाती तो अपनी मां से यही सवाल करती कि पैदा होते ही मुझे जानवरों को निवाला बनने के लिए क्यों छोड़ गई तुम मां....। इसमें मेरा क्या कसूर था, तुम ही तो दुनिया में लाई थी मुझे और अब तुमने ही मरने के लिए छोड़ दिया। दो दिन की यह बच्ची टोंक जिले में मिले हैं एक खेत की मेढ पर कांटों के बीच फंसी, रोती, बिलखती.....। उसे अस्पताल के एनआईसीयू में भर्ती कराया गया है। डॉक्टर्स का कहना है कि वह एक दो दिन तक लगातार ऑब्जर्वेशन में है, दो दिन निकाल लिए तो बच्ची बच जाएगी। फिलहाल बच्ची को सआदत अस्पताल में भर्ती कराया गया है और वहां उसका इलाज चल रहा है। पूरा मामला टोंक जिले के सदर थाना इलाके का है।
सदर पुलिस ने बताया कि बच्ची थाना इलाके में स्थित जयपुर - कोटा नेशनल हाईवे52 पर बाड़ा जेरेकिला स्थित बकरा मंडी की तरफ खेत की बाड़ के पास झाड़ियों में मिली। उसे अस्पताल पहुंचाया गया। उसके शरीर में कांटे धंस गए थे, इन कांटों के कारण उसे असहनीय दर्द हो रहा था। डॉक्टर्स और नर्स ने बच्ची को संभाला तो उनकी भी आंखे नम हो गई। उसे साफ किया गया, इलाज किया गया और अब एनआईसीयू में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। बच्ची अस्पताल के कपड़ों मंे ही मिली है। पुलिस का मानना है कि आसपास किसी निजी अस्पताल में उसका जन्म हुआ है और वह अवैध संतान हो सकती है।
एक ओर मां बनने को तरस रही महिलाएं, दूसरी ओर बच्चे फेंके जा रहे.... बच्चे फंकने में सबसे आगे राजस्थान
अब बात उन महिलाओं की जो शादी के बाद मां बनने के लिए तरह तरह के जतन कर रही हैं। राजस्थान में हर साल हजारों महिलाएं सख्त मेडिकल ट्रीटमेंट से गुजर रही हैं। निजी अस्पताल में महिला चिकित्सा अधिकारी मंजू शर्मा का कहना है कि हजारों महिलाएं हर साल अब आईवीएसफ जैसे ट्रीटमेंट की ओर बढ़ रही हैं ताकि वंश आगे ले जा सकें, मां बनने का सुख ले सकें और खुद को पूर्ण कर सकें। पिछले पांच साल के दौरान राजस्थान में हजारों महिलाओं ने इसी तरह से बच्चों को जन्म दिया हैं, लेकिन इतना करने के बाद भी हजारों महिलाएं ऐसी भी हैं जिनकी कोख सूनी की सूनी ही रह गई है। फिलहाल राजस्थान में आईवीएसफ से बड़ा ट्रीटमेंट बच्चों के जन्म के लिए नहीं है।
उधर एनसीआरबी केसेज की बात की जाए तो पिछले सालों के रिकॉर्ड बताते हैं कि रेप और महिला संबधी अपराधों में राजस्थान एक नंबर पर है। यही कारण है कि इस तरह के अपराधों के बाद अनचाहे गर्भ का सामना करने वाली महिलाओं और किशोरियों की संख्या भी ज्यादा है। इसका सबसे बुरा पहलू ये है कि साल 2015 से लेकर साल 2019 तक चार साल के आंकडों में राजस्थान में 605 बच्चों को मां का प्यार नहीं मिला। इनमें से करीब तीस की तो भ्रूण हत्या कर डाली गई। इसके अलावा बाकि को मरने के लिए छोड़ दिया गया। इनमें से अधिकतर को बचाया गया है और वे अनाथ आश्रमों में अपना जीवन जी रहे हैं। राजस्थान के बाद यूपी, एमपी और हरियाणा जैसे राज्यों का नंबर आता है।
अब बात बच्चों को गोद लेने वाले जटिल प्रोसेस की..... 16000 दम्पत्ति चाहते हैं बच्चे.. दो से तीन साल की वेटिंग
पिछले साल इस बारे में एक आरटीआई के जरिए जानकारी मिली कि देश में करीब चार हजार से भी ज्यादा बच्चे जो नवजात हैं और जिनकी माओं ने उनको मरने के लिए फेंक दिया.... उन बच्चों को गोद लेने के लिए देश भर के 16000 से भी ज्यादा दम्पत्तियों ने प्रयास किए हैं। सभी जरूरी दस्तावेज सरकारी नियमों के अनुसार जमा करा दिए लेकिन उसके बाद भी उनको दो से तीन साल की वेटिंग दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को गोद देने के नियम पूरे भारत के लगभग सभी राज्यों में बेहद जटिल है। इसी तरह के हाल राजस्थान में भी हैं।
बच्ची गोद में लेकिन उसे गोद लेने के लिए दो साल का इंतजार करना पडा, बच्ची ने हाथों में ही दम तोड़ दिया
बच्चों को गोद देने की जटिल प्रकिया का नजारा कुछ साल पहले जयपुर में ही देखने को मिला। प्रक्रिया इतनी जटिल रही कि बच्ची को गोद लेने के आए दम्पत्ति उसे गोद नहीं ले सके और बच्ची की मौत हो गई। दरअसल नवजात बच्ची को करीब चार साल पहले एक मां ने मरने के लिए खेत में फेंक दिया। नागौर पुलिस ने बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। वहां से उसे जयपुर रेफर किया गया। विनोद और साक्षी नाम के एक कपल को इसकी जानकारी मिली। वे नागौर गए, वहां से जयपुर आए, बच्ची को हाथों में खिलाया। गोद की प्रक्रिया शुरू की, लेकिन 27 दिन तक कुछ नहीं हुआ और पता चला कि बच्ची की मौत हो गई।
Published on:
11 May 2023 01:44 pm
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