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विधवा मां के संषर्घ की कहानी: सेरेब्रल पॉल्सी बेटे को बनाया अन्तरराष्ट्रीय खिलाड़ी

यह कहानी है एक विधवा महिला के सब्र और हौसले की। सेरेब्रल पॉल्सी से पीडि़त चंदन वर्मा (23) ने देश ही नहीं बल्कि विदेश में पिंकसिटी का नाम रोशन किया है।

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जयपुर। यह कहानी है एक विधवा महिला के सब्र और हौसले की। सेरेब्रल पॉल्सी से पीडि़त चंदन वर्मा (23) ने देश ही नहीं बल्कि विदेश में पिंकसिटी का नाम रोशन किया है। चंदन को इस मुकान तक पहुंचाने का श्रेय उनकी मां नंदू देवी को जाता है। जब नंदू देवी 27 साल की थी और चंदन चार साल के, तभी उनके पति रामेश्वर प्रसाद वर्मा की मौत हो गई थी।

सरकारी नौकरी में होने की वजह से नंदू देवी को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नौकरी मिल गई। परिवार ने भी कुछ खास सपोर्ट नहीं किया। नंदू देवी ने जयपुर में अकेले ही अपने तीनों बच्चों को पाला। नंदू देवी ने बताया, 'पांच साल की उम्र तक चंदन चल-फिर भी नहीं पाता था।

डॉक्टर्स को भी खूब दिखाया। थैरेपी और दवाइयों की मदद से उसने चलना शुरू किया। भाई-बहन की मदद से चंदन ने पढ़ाई की। मगर दसवीं क्लास में फेल हो गया।

उसने शुरू से ही मुझे संघर्ष करते देखा था, इसीलिए चंदन ने कभी हार नहीं मानी। हमें शुरुआत में पता ही नहीं था कि चंदन को सेरेबल पॉल्सी है। डॉक्टर कहते थे कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ेगी, ठीक होता जाएगा।

फेल होने के बाद मानसरोवर में एक ट्रेनिंग कैम्प में जाना शुरू किया। वहीं पता चला कि उसे सेरेबर पॉल्सी है। वहां उसका रुझान खेलों की तरफ हो गया। जो बच्चा कभी चल भी नहीं पाता था, उसने दौडऩा शुरू कर दिया। फुटबॉल, बैडमिंटन व दूसरे खेल भी खेलने लगा।

फुटबॉल में दो बार सेरेब्रल पॉल्सी की टीम को राज्य स्तर पर मैडल दिलवाया है। पिछले दिनों बार्सिलोना में देश का प्रतिनिधित्व किया। वहां सौ, दो सौ व चार सौ मीटर की सेरेबल पॉल्सी की रेस में भाग लिया।' नंदू देवी ने संघर्ष कर न केवल अपने बेटे के चलना सिखाया, बल्कि आज वह दौड़ता है। अपने सारे काम खुद करता है।