
झालाना चौकी में एक के ऊपर एक खड़े जब्त वाहन: फोटो-पत्रिका
मोहित शर्मा.
जयपुर. राजस्थान के पुलिस थानों में कबाड़ वाहनों का पहाड़ सा बना हुआ है। कई वाहन तो मिट्टी में ही दफन हो गए हैं। इन वाहनों के कारण रास्तों में जाम की समस्या तक बनी हुई है। थानों में जगह के अभाव में वाहन सडक़ों पर सालों से खड़े हैं। राजधानी जयपुर की बात करें तो वीवीआईपी एरिया ज्योति नगर थाना में ही वाहनों का पहाड़ बना हुआ है। जबकि ये थाना विधानसभा के सामने है। खास बात ये है कि आमजन का वाहन सडक़ पर खड़ा होने पर पुलिस उसे जब्त कर लेती है या फिर चालान काट देती है, जबकि पुलिस थानों में जब्त वाहन सालों से सडक़ पर ही जमा हैं। पूरे प्रदेश का कुछ ऐसा ही हाल है। लेकिन लोग पुलिस के डर से उन्हें कुछ नहीं बोलते।
वाहन एक दूसरे के ऊपर खड़े हैं। तेज आंधी आने की स्थिति में ये दुर्घटना का कारण भी बन सकते हैं। पॉश एरिया है, फिर भी हालात ऐसे हैं।
यहां तो हाल बहुत बुरे हैं। वाहन थाने के बाहर सडक़ पर खड़े हैं। सडक़ निर्माण का भी कार्य चल रहा है। ऐसे में लोगों को निकलने में परेशानी हो रही है। साथ ही कई वाहन जमींदोज हो रहे हैं। कई वाहनों में पेड़ पौधे उग आए हैं।
यहां तो कई वाहन मिट्टी में दबकर गलने लग गए हैं। सालों से इनका निस्तारण नहीं हुआ है। सडक़ तक जब्त वाहन यहां खड़े हैं।
यहां वाहन तो चौकी में अंदर खड़े हैं, लेकिन ये दुर्घटना का निमंत्रण दे रहे हैं। चौकी में जब्त ट्रक के ऊपर कार, कार के ऊपर जीप और जीप के ऊपर ऑटो लटक रहा है।
यहां जब्त वाहन थाने के बाहर सडक़ पर खड़े हैं, जिससे जाम की सी स्थिति बन जाती है। पास ही केन्द्रीय विद्यालय है, ऐसे में यहां स्कूल की छुट्टी के समय जाम लग जाता है।
पुलिस विभिन्न मामलों (जैसे आपराधिक घटनाएं, दुर्घटनाएं, या शराबबंदी अभियान) में जब्त किए गए वाहनों को थानों में रखती है। नियमानुसार, लावारिस या जब्त वाहनों का निस्तारण 6 महीने बाद शुरू किया जा सकता है, यदि मालिक उन्हें क्लेम करने नहीं आता। इस दौरान, पुलिस को वाहन मालिक को सूचित करने के लिए नोटिस जारी करना होता है, जो मालिक के रजिस्टर्ड पते पर भेजा जाता है। इसके अलावा, सार्वजनिक स्थानों पर पंपलेट या समाचार पत्रों में विज्ञापन के माध्यम से जानकारी दी जाती है।
जानकारी के अनुसार यदि 6 महीने के बाद भी कोई मालिक वाहन लेने नहीं आता, तो पुलिस कोर्ट से चालान रद्द करने का अनुरोध करती है। साथ ही, एनसीआरबी से वाहन का रिकॉर्ड चेक किया जाता है। इसके बाद, नीलामी की प्रक्रिया शुरू होती है, जिसमें वाहनों को सार्वजनिक नीलामी में बेचा जाता है या स्क्रैप किया जाता है। नीलामी से प्राप्त राजस्व सरकार को जाता है, जो सरकारी खजाने में जमा होता है।
नीलामी में खरीदे गए वाहनों का स्वामित्व परिवर्तन एक जटिल प्रक्रिया है। खरीदार को परिवहन विभाग और थाने के चक्कर काटने पड़ते हैं, जिसमें चेसिस और इंजन नंबर की जांच, दस्तावेजों की पूर्णता, और अन्य औपचारिकताएं शामिल हैं।
नीलामी की प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली होती है। इसमें कोर्ट की अनुमति, मालिक की पहचान, और एनसीआरबी रिकॉर्ड की जांच जैसे कई चरण शामिल हैं, जिसके कारण थाना प्रभारी अक्सर इस प्रक्रिया में पडऩा नहीं चाहते। कुछ मामलों में, थाना प्रभारी और अधिकारी नीलामी की जिम्मेदारी से बचते हैं, क्योंकि यह अतिरिक्त काम माना जाता है।
थानों में जब्त वाहनों के लिए उचित रखरखाव और स्थान की कमी होती है। ये वाहन खुले में पड़े रहते हैं, जिससे बारिश और धूप में खराब होकर कबाड़ बन जाते हैं। ये वाहन सडक़ों पर ही खड़े रहते हैं।
दिल्ली में हाल ही में नियम बदले गए हैं, जहां 30 दिनों के भीतर वाहन न छुड़ाने पर स्क्रैप या नीलामी की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। राजस्थान में भी ऐसी सख्त नीतियों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
Updated on:
28 May 2025 11:33 am
Published on:
28 May 2025 10:55 am

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