
जयपुर
बाघों के आबादी क्षेत्र में जाने से दहशत का माहौल बना हुआ हैं। रणथंभौर राष्ट्रीय अभयारण्य से बाघ निकलकर लगातार आबादी क्षेत्र में दस्तक दे रहे हैं। करीब दो सप्ताह से बाघों के आबादी क्षेत्र में दस्तक देने का सिलसिला जारी हैं। रणथंभौर के बाणपुर,अनियाला और खिदरपुर के आबादी क्षेत्रों में बाघों का मूवमेंट बना हुआ हैं। बाघों की दहशत से अब ग्रामीणों ने खेत तक में जाना छोड़ दिया हैं। बाघ के लगातार मूवमेंट के कारण अब ग्रामीण एकांत में बाहर नहीं निकल रहे है और ग्रुप में जरुरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अभयारण्य के वन क्षेत्र से निकलकर बाघ लगातार उनके खेतों में आ रहे है। हालांकि वह बार बार वन विभाग को इसके बारे में सूचित कर चुके है लेकिन फिर भी बाघों का आना नहीं रुक रहा हैं। बाघ ने दो सप्ताह पहले खेत में काम रहे एक किसान पर हमला भी कर दिया था वहीं मवेशी का भी शिकार किया था। जिसके बाद से ग्रामीण ज्यादा दहशत में हैंं। ग्रामीणों ने बताया कि शुक्रवार को फिर बाघ का मूवमेंट जंगल के पास स्थित ग्रामीण इलाके में देखा गया। जहां पर खिदरपुर में बाघ स्कूल के पास करीब तीन घंटे तक बैठा रहा। ग्रामीणों ने बाघ को देखकर वन विभाग को सूचना दी। जिसने एहतियात के तौर पर उस रास्ते को कुछ देर के लिए बंद कर दिया। वहीं बाघ पर नजर बनाकर रखी। करीब तीन घंटे बाद बाघ वापस जंगल में गया तो लोगों ने राहत की सांस ली। बार बार ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहे बाघ के मूवमेंट पर वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीणों की खेत की सीमा और जंगल का क्षेत्र बिल्कुल सटे हुए हैं। ऐसे में बार बार बाघों का मूवमेंट इन आबादी क्षेत्र में बना हुआ हैं। अभयारण्य से निकलकर बाघ टी 66, टी 54 और टी 116 का मूवमेंट इन इलाकों में ज्यादा बना हुआ हैं। वन विभाग की टीम भी इन्हें यहां आने से रोक नहीं सकती है क्योकि यहां पर खेत बिल्कुल जंगल से सटे हुए हैं। ऐसे में बार बार इनका मूवमेंट बना हुआ हैं। हालांकि बाघ के आने से ग्रामीणों को काफी नुकसान हो रहा हैं।
रणथंभौर के आसपास में 2400 परिवार
रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान में वन विभाग की ओर से पिछले 18 साल में करीब आधा दर्जन गांवों को यहां से अलग जगह बसा दिया गया हैं। लेकिन अभी भी यहां पर करीब 2400 परिवार बसे हुए हैं। जिनको इस क्षेत्र से अलग करने पर ही इस समस्या का समाधान होगा। रणथम्भौर वर्ष 2002 से गांवों को विस्थापन की कवायद जारी है। लेकिन अभी भी यहां वन विभाग की ओर से आगामी महीनों में करीब 23 गांवों को विस्थापित करने का लक्ष्य है। इनमें इंडाला , मचानकी , पादड़ा , मोरडूंगरी ,कठूली, कालीभाट, मुंद्राहेड़ी, भिड़, हिंदवाड़, हलोंदा, कुशालीपुरा, भैरु पुरा, हज्जामखेड़ी, महुपुरा, बोदल, गढी कालाखेहरा(तालेड़ा), नीमली कलां, जालपाखेड़ी, हरीपुरा, भावपुर, सावटा, खिदरपुर जादौन, भाटपुरा आदि गांवों का विस्थापन किया जाना हैं। यहां से आबादी दूर होने पर ही बाघों और ग्रामीणों की समस्या का समाधान होगा।
Published on:
18 Jan 2020 10:08 am
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