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राज्य के सिनेमाघर अपनी भव्यता के लिए दुनियाभर में मशहूर रहे हैं। मल्टीप्लेक्स के आने से पहले अकेले जयपुर शहर में 18 से ज्यादा सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर थे, जिनमें फिल्मों ने सिल्वर-गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन भी किया था। राम तेरी गंगा मैली, हम आपके हैं कौन... जैसी फिल्मों ने तो 75 सप्ताह तक रिलीज रहकर रेकॉर्ड भी बनाया है।
अब ऐसे ही सिंगल थिएटर्स न केवल दर्शकों के लिए तरस रहे हैं, बल्कि बंद होने के कगार पर यानी अंतिम सांसें गिन रहे हैं। जयपुर शहर में मात्र पांच सिंगल थिएटर ही बचे हैं, इनमें सिर्फ राजमंदिर हमेशा दर्शकों से आबाद रहता है। फिल्म विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिनेमाघर अपनी बनावट और आर्टिस्टिक ब्यूटी के लिए टूरिस्ट्स स्पॉट बन गया है, जिसके कारण देश-दुनिया के पर्यटक यहां आना पसंद करते हैं।
मॉल्स में मल्टीप्लेक्स आने से आया बदलाव
फिल्म विशेषज्ञों का कहना है कि जयपुर सहित अन्य शहरों में मॉल्स बनने के साथ ही मल्टीप्लेक्स आने लगे। तब से सिंगल थिएटर्स पर प्रभाव पड़ने लगा। तकनीक के अभाव में भी ये मल्टीप्लेक्सेज से पिछड़ने लगे। इसके बाद कोरोना ने इन सभी की कमर तोड़ दी। आर्थिक समस्याओं के कारण सिंगल थिएटर बंद होते चले गए। आज सिनेमाघरों से ज्यादा ओटीटी की तरफ दर्शक आकर्षित हो रहे हैं। हालात यह है कि पहले भीड़ यहां आती थी, अब सिनेमा के लिए भीड़भरे मॉल्स में जगह तलाशी जा रही है। वर्तमान में जयपुर में राजमंदिर, जैम, कोहिनूर, लक्ष्मीमंदिर और पारस सिनेमा ही एकल सिनेमाघर के रूप में चल रहे हैं।
इधर...कोरोना में शुरू हुआ जैम
मल्टीप्लेक्स आने के बाद सांगानेरी गेट के पास बना जैम सिनेमा बंद कर दिया गया था। इसके बाद कोरोना काल में इसे पूरी तरह रिनोवेट कर दर्शकों के लिए फिर से खोला गया। कोहिनूर शहर से बाहर होने के कारण यहां ऑडियंस जुड़ी हुई है। लक्ष्मीमंदिर सिनेमाहॉल भी कोराना में बंद हो गया था, यह रिनोवेशन के बाद अब फिर से दर्शकों के लिए उपलब्ध है।
Published on:
06 Nov 2022 10:29 pm
