
Nagapanchami
जयपुर। सावन माह लगते ही त्योहारों की बौछार होना शुरू हो जाती है। तीज से लेकर रक्षाबंधन तक के त्योहार इसी माह में दस्तक देते हैं। इनमें से नाग पंचमी का भी खासा महत्त्व है। नाग पंचमी के दिन सर्पों की पूजा की जाती है। हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी मनाई जाती है।
सांपों से खास लगाव रखते हैं देवता
प्राचीन काल से ही आराध्य देवों और देवियों में सांपों से खास लगाव रहा है। भगवान विष्णु और शिव में सांपों का प्रेम देखने को मिलता है। यहां तक कि मां पार्वती के मंदिरों में भी नागों की पूजा की जाती है। विशेषतौर से नागपंचमी के दिन सापों की पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है।
मनसा देवी की करते हैं पूजा
पुराणों के अनुसार नागों को पाताल लोक या फिर नाग लोक का स्वामी माना गया है। नागपंचमी को सर्पों की देवी यानि मनसा देवी की पूजा अर्चना की जाती है। दरअसल, नागराज वासुकी की बहन मनसा देवी को भगवान शिव का अंश माना है। मनसा देवी का मंदिर हिमालय के शिवालिक पर्वत पर विराजमान है। ऐसी मान्यता है कि मनसा देवी की नाग पंचमी को पूजा करने से सर्प दोष दूर होता है और मनोकामना पूर्ण होती है। पड़ोसी देश नेपाल में तो नाग पंचमी उत्साह के साथ मनाई जाती है। सांपों को दूध पिलाकर श्रद्धालु अपने परिवार की सुख-शांति और सुरक्षा की कामना करते हैं।
ये है मान्यता
पुराणों के अनुसार यमुना नदी में जब कालिया नाग ने विष घोल दिया तो नदी का सारा पानी जहरीला हो गया था। इससे बृजवासियों के लिए पानी को लेकर संकट खड़ा हो गया। इसके चलते भगवान कृष्ण ने गेंद ढूढंने के बहाने यमुना नदी में छलांग लगाई। इस दौरान कालिया नाग से युद्ध करके उसे पराजित कर दिया। हारे नाग ने पंचमी के दिन पानी में घुले जहर को वापस अवशोषित कर लिया। वहीं कान्हा ने उन्हें वरदान दिया कि पंचमी के दिन सापों को दूध पिलाने से भक्तों की मनोकामना पूर्ण होगी। इसके बाद से नाग पंचमी को धूमधाम से मनाया जाने लगा है।
Published on:
1 Aug 2018, 6:26 PM IST
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