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कोरोना काल के बाद प्राकृतिक चिकित्सा की तरफ बढ़ा युवाओं का रूझान

दुनियाभर में 18 नवंबर को राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस मनाया जाता है।

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कोरोना काल के बाद प्राकृतिक चिकित्सा की तरफ बढ़ा युवाओं का रूझान

कोरोना काल के बाद प्राकृतिक चिकित्सा की तरफ बढ़ा युवाओं का रूझान

जयपुर। दुनियाभर में 18 नवंबर को राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा दिवस मनाया जाता है। वर्तमान समय में प्राकृतिक चिकित्सा से गंभीर बीमारियों का उपचार सुलभ तरीके से हो रहा हैं। इसी दिन महात्मा गांधी ने 1945 में प्राकृतिक चिकित्सालय की स्थापना की जो वर्तमान में पुणे में राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान के रूप में संचालित हैं। प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान जयपुर के डॉ दिलीप सारण ने बताया कि कोरोनाकाल के बाद युवाओं में प्राकृतिक चिकित्सा को लेकर रूझान बढ़ा है। अब सबसे ज्यादा युवा प्राकृतिक चिकित्सा को लेकर जागरूक हो रहे है।

उन्होंने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा में आहार चिकित्सा, उपवास चिकित्सा, मिट्टी चिकित्सा, जल चिकित्सा, सूर्य किरण चिकित्सा, वायु चिकित्सा, क्षेत्रीय वनौषधियां का बिना दुष्प्रभाव प्रयोग होता हैं। जिसमें मुख्य उपचार मिट्टी की पट्टी, मिट्टी का स्नान, सूर्य स्नान, गर्म और ठंडा सेक, कटी स्नान, मेहन स्नान, पैर-हाथ का गर्म सेंक, वाष्प स्नान, पूर्ण टब स्नान, रीढ़ स्नान सर्वांग गीली चादर लपेट, छाती व घुटने की पट्टी, एनिमा, जलनेती, वमन, माथे की पट्टी, पेट पर पट्टी रोगानुसार मालिश की क्रियाएं की जाती हैं। इस चिकित्सा से पेट कि खराबी, दाद खाज ,त्वचा रोग, वात रोग, पुराने दर्द ,गठिया, कब्ज, अपच आदि रोगों का उपचार हो रहा हैं।


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