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Jaipur Amyra death case: हाईकोर्ट में CBSE का जवाब पेश, कहा, नीरजा मोदी स्कूल में एंटी बुलिंग कमेटी कागजों में

Amyra death case: जयपुर में नीरजा मोदी स्कूल की संबद्धता रद्द करने के मामले में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने हाईकोर्ट में जवाब पेश कर दिया। सीबीएसई ने करीब 170 पेज के जवाब में कहा कि स्कूल में एंटी बुलिंग कमेटी कागजी थी।
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पत्रिका फाइल फोटो

पत्रिका फाइल फोटो

Amyra death case: जयपुर में नीरजा मोदी स्कूल की संबद्धता रद्द करने के मामले में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने हाईकोर्ट में जवाब पेश कर दिया। सीबीएसई ने करीब 170 पेज के जवाब में कहा कि स्कूल में एंटी बुलिंग कमेटी कागजी थी। इसके कारण डेढ़ साल से एंटी बुलिंग की शिकार छात्रा अमायरा के अभिभावकों की ओर से 4 बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। वहीं स्कूल में सुरक्षा के लचर इंतजाम भी पाए गए।

मॉनिटरिंग होती तो बच सकती थी जान

सीबीएसई के अधिवक्ता एमएस राघव ने कोर्ट को बताया कि स्कूल में क्लास-4 ग्राउंड फ्लोर पर थी, जहां से 9 वर्ष की अमायरा 1 नवंबर 2025 को स्कूल भवन की चौथी मंजिल पर चली गई। हालांकि वहां जाना प्रतिबंधित था। स्कूल सीसीटीवी से लैस है, लेकिन मॉनिटरिंग की व्यवस्था नहीं हैं। ऐसे में किसी को पता ही नहीं चला कि बच्ची चौथी मंजिल पर कैसे पहुंच गई। अगर सीसीटीवी की मॉनिटरिंग की जाती तो संभवतया अमायरा की जान बचाई जा सकती थी।

ये है अमायरा खुदकुशी मामला

जयपुर की नीरजा मोदी स्कूल में बीते साल 1 नवंबर को कक्षा 4 की छात्रा अमायरा ने स्कूल के चौथी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। सीबीएसई ने इसे छात्र सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन बताते हुए कहा कि ऐसे असुरक्षित वातावरण में बच्चों को पढ़ाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

ये खामियां भी हुई उजागर

सीबीएसई की जांच रिपोर्ट में स्कूल में कई खामियां उजागर हुईं। स्कूल में बच्चे आई-कार्ड नहीं पहनते, इसलिए आधे घंटे तक यह पता नहीं चला कि कूदने वाली बच्ची कौन है। चौथी मंजिल पर सेफ्टी नेट भी मौजूद नहीं था। बिल्डिंग बायलॉज और डिजास्टर मैनेजमेंट नियमों के तहत काउंसलर और वेलनेस एक्सपर्ट अनिवार्य हैं, लेकिन स्कूल में प्रशिक्षित काउंसलर नियुक्त नहीं किया गया। घटना वाले दिन स्कूल प्रबंधन ने फर्श पर खून के धब्बों को मौके से मिटा दिया था। इस पर स्कूल ने इसके लिए सफाईकर्मी को जिम्मेदार बताकर पल्ला झाड़ लिया जिसे सीबीएसई ने नकार दिया था।

6 साल में 2532 ने आत्महत्या की

सीबीएसई ने हाईकोर्ट में पेश किए गए जवाब में कहा कि राजस्थान में साल 2020 से 2025 के बीच कोटा, जयपुर, जोधपुर, सीकर सहित कई जिलों में 2532 छात्रों और युवाओं की ओर से आत्महत्या के मामले सामने आए हैं।