
राजधानी के इस बड़े मंदिर पर मंडरा रहा है निपाह का खतरा, सवा लाख भक्त हर रोज आते हैं दर्शन करने, संक्रमण का
जयपुर
केरल और कनार्टक में चमगादड़ों से फैलने वाले निपाह वारयस के खतरे के बीच जयपुर के गोविंद दरबार में भी भक्तों की चिंता बढ़ गई है। यहां निपाह के डबल अटैक से बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है। गोविंद देव जी के मंदिर में स्थित सालों पुराने इमली के पेड़ पर लटके सैकड़ों चमगादड़ यहां आ रहे भक्तों की समस्या बढ़ा रहे हैं। दरअसल निपाह वायरस के खतरे के बाद राजस्थान समेत चार राज्यों के लिए अलर्ट भी जारी किया गया है। वायरस से बचने के लिए सीधे तौर पर चमगादड़ों से दूर रहने की नसीहत दी जा रही है।
चमकादड़ों के फेंके फल खा रहे बंदर, भक्तों के सीधे संपर्क में आ रहे
वायरल का डबल अटैक हो सकता है। लोग सीधे इसके संपर्क में आ सकते हैं। मंदिर में सालों पुराने स्थित इमली के जिस पेड पर चमकादड़ लटके हैं उसके नीचे बंदरों को फल और अन्य खाने की वस्तुएं देने की जगह है। पेड़ से जो इमली के फल नीचे गिरते हैं वे फल बंदर खाते हैं। बंदरों को लोग सीधे हाथों में फल भी देते हैं और ये बंदर वहां भक्तों के संपर्क में भी आते हैं। भक्तों के साथ ही ये बंदर कुत्ते और यहां घुमने वाली गायों के साथ भी रहते हैं।
पेड़ के नीचे ही पीने की टंकी, पीने के काम आता है पानी
जिस पेड़ पर सैंकड़ों की संख्या में चमकादड़ लटके हैं उसी पेड़ के नीचे पीने के पानी की एक टंकी भी है। इस टंकी से ही मंदिर आने वाले हजारों भक्त पानी पीते हैं। इस टंकी के पास ही दो गार्डन भी हैं जहां पर सवेरे और शाम सैंकड़ों की संख्या में बच्चे भी आते हैं ये बच्चे भी इसी पानी की टंकी से पानी पीते हैं।
छह झाकियाें में सवा लाख से भी ज्यादा आते हैं भक्त
गोविंद देव जी के मंदिर में आने वाले भक्तों की संख्या शहर के किसी भी मंदिर में आने वाले भक्तों की संख्या से बहुत ज्यादा है। सवेरे चार बजे से रात सात बजे तक मंदिर में सात झांकियां होती है। सवेरे और शाम को होने वाले झांकि में ही करीब तीस हजार से ज्यादा भक्त शामिल होते हैं। इनके अलावा आठ बजे और शाम पांच बजे झांकी में भी हजारों की संख्या मंे भक्त आते हैं। प्रबंधन की मानें तो सवेरे से शाम तक सभी झाकियों में करीब सवा लाख से भी ज्यादा भक्त आते हैं।
पेड़ के पास स्थित हनुमान मंदिर, रोज आते हैं हजारों भक्त
जिस पेड़ पर सैंकड़ों की संख्या में चमगादड़ लटके हैं उसके पास ही हनुमान जी का प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर में गोविंद देव जी आने वाले हजारों भक्त आते हैं। वायरस का खतरा लोगों के मन में भी है इस कारण से हनुमान मंदिर आने अधिकतर भक्तों ने मंदिर आने का रास्ता बदल लिया है।
Published on:
28 May 2018 12:24 pm
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