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Rajasthan Weather: अब तो रहम करो ! बेमौसम बारिश से फसलों पर आफत, मुनाफे की उम्मीद खत्म, पहली बार अक्टूबर में खुला बांध

Crop Damage : हालात ये हो गए हैं खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो रही हैं। पीला सोना कहे जाने वाली सोयाबीन की फसल गल गई है। स्थिति यह हो गई है कि अक्टूबर माह में पहली बार चम्बल से गेट दुबारा खोलने पड़ गए हैं।

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जयपुर

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Rajesh Dixit

Oct 13, 2024

जयपुर। इस बार राजस्थान में इन्द्रदेव कुछ ज्यादा ही मेहरबान हो रहे हैं। ज्यादा बारिश से अब किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट दिखाई देने लगी हैं। शनिवार व रविवार को हुई बारिश से हालात ये हो गए हैं खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो रही हैं। पीला सोना कहे जाने वाली सोयाबीन की फसल गल गई है। स्थिति यह हो गई है कि अक्टूबर माह में पहली बार चम्बल से गेट दुबारा खोलने पड़ गए हैं।

फिर दगा दे गई किसानों की किस्मत, बारिश से भीगी फसलें
चित्तौडगढ़़ जिले में मानसून की विदाई के बाद शनिवार और रविवार को हुई बारिश से किसानों को किस्मत एक बार फिर दगा दे गई। खेत और खलिहानों पर पड़ी कटी फसलों को भारी नुकसान हुआ है। निम्बाहेड़ा और डूंगला उपखण्ड क्षेत्र के किसान तो तबाही के कगार पर पहुंच गए हैं।
जिले में शनिवार शाम व रविवार को सुबह हुई बारिश से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। किसान अब गिरदावरी करवा कर मुआवजे की मांग कर रहे हैं। चित्तौडगढ़़ सहित निम्बाहेड़ा, डूंगला, भदेसर क्षेत्र के चरलिया, भैरूखेड़ा, कनेरा घाटा क्षेत्र के गांवों टाटरमाला सहित जिले भर में सोयाबीन, मक्का और मंूगफली की फसलों में बारिश के कारण भारी नुकसान हुआ है। बारिश से सत्तर से नब्बे फीसदी नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है। कृषि विभाग नुकसान को लेकर सर्वे कार्य में जुट गया है।

पीले सोने पर पानी की मार, किसानों की मेहनत बेकार
मांगरोल. इस बार धरतीपुत्रों पर इंद्रदेव की इतनी मेहरबानी हुई कि खेतों में बोई सोयाबीन की फसल कहीं गल गई तो कहीं कम पैदावार के रूप में सामने आई। अब जैसे-तैसे फसल हाथ लगी तो फिर बरसात ने किसानों की हालत पतली कर दी है। अभी खेतों खलिहानों में सोयाबीन की फसल कटी पड़ी है। जिन खेतों में फसल तैयार हो गई तो उन्होंने खुले में सडक़ों मैदानों में सुखा रखी है। सूखने के बाद अच्छे भाव मिलने की उम्मीद भी रविवार को आई बरसात ने मटियामेट कर दी।
रविवार को सुबह दो घंटे तक लगातार रिमझिम बारिश हुई। दोपहर में फिर बूंदाबांदी का दौर चला। इससे खुले आसमान तले सूख रही सोयाबीन गीली हो गई। अब इसकी क्वालिटी में अंतर आएगा तो भाव कम मिलेगा। किसानों ने प्रति बीघा कम पैदावार के चलते इसे सुखाकर बेचने का मानस बनाया।

अक्टूबर में पहली बार खुले चम्बल के बांधों के गेट
रावतभाटा/ कोटा. वेदर सर्कुलेशन सिस्टम के चलते राणा प्रताप सागर बांध के कैचमेंट में शनिवार रात तेज बारिश के बाद चंबल की सहायक नदी गुंजाली में उफान आ गया। पानी की आवक को देखते हुए रविवार को राणा प्रताप सागर बांध का एक गेट खोलकर जलप्रवाह शुरू किया गया। इसके चलते जवाहर सागर 2 व कोटा बैराज के4 गेट खोले गए। पहली बार अक्टूबर में चम्बल के बांधों के गेट खोले गए हैं। इससे पहले सायरन बजाकर डाउन स्ट्रीम क्षेत्र में रह रहे लोगों को अलर्ट किया गया।

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