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जयपुर . राज्य में कमाई के लालच में निजी स्कूलों की लूट का आलम देखिए, बच्चे का एडमिशन तो एक ही बार होता है लेकिन एडमिशन फीस हर साल वसूल रहे हैं। दशकों से यह फीस एक ही बार ली जाती रही है लेकिन मनमर्जी का नियम बनाकर ज्यादातर निजी स्कूल अभिभावकों की जेब से मोटी रकम ऐंठ रहे हैं।
निजी स्कूलों में पढ़ाई के लिए ट्यूशन फीस जितनी ही अन्य फीस भी वसूली जा रही है। इनमें एडमिशन फीस मुख्य है। सत्र की शुरुआती तिमाही में ही 'एडमिशन' फीस ली जा रही है जबकि बच्चा उसी स्कूल की अगली कक्षा में क्रमोन्नत किया जाता है। छोटे स्कूलों में यह फीस 1500 रुपए व बड़े स्कूलों में 6 से 8 हजार रुपए तक है।
पहली तिमाही में ही जोड़ी, अभिभावकों को पता नहीं
अभिभावक आपत्ति न करें, इसके लिए भी निजी स्कूलों ने रास्ता निकाल रखा है। एडमिशन फीस अलग से लेने की बजाय इसे कुल फीस की पहली तिमाही में ही जोड़ा जा रहा है। यही कारण है कि पहली तिमाही के मुकाबले अन्य तिमाही की फीस में अंतर मिल पाया जा रहा है। कोई अभिभावक पूछताछ करे तो टालमटोल किया जाता है या अन्य खर्च बताकर कन्नी काट ली जाती है।
ऐसे समझें एडमिशन फीस का गणित
मध्यम स्तर का निजी स्कूल
स्कूल में बच्चों की संख्या : 1000
प्रति छात्र एडमिशन फीस : 3000
कुल एडमिशन फीस : 30 लाख रुपए
(यानी क्रमोन्नत किए जा रहे बच्चों से भी एक स्कूल एडमिशन फीस के नाम पर 30 लाख रुपए कमा रहा है)
जितना बड़ा स्कूल, राशि उतनी ही ज्यादा
शहर के नामचीन स्कूलों में तो 50 से 60 हजार रुपए तक एडमिशन फीस ली जा रही है। हालांकि इन स्कूलों का दावा है कि यह फीस छात्र से केवल एक ही बार ली जाएगी।
नहीं दे रहे पक्का बिल
स्कूलों की मनमर्जी इस हद तक है कि अभिभावकों को पक्का बिल भी नहीं दे रहे हैं। कई स्कूल सिर्फ सादे कागज पर फीस लिखकर दे रहे हैं। जमा कराने पर फीस कार्ड बना दिया जाता है। इसमें इसे केवल अपडेट किया जा रहा है।
ये हैं अलग-अलग फीस
- एडमिशन फीस : 50 से 60 हजार रुपए
- इम्प्रेस्ट फीस : 4 से 6 हजार रुपए
- सिक्योरिटी जमा : 20 से 30 हजार रुपए
- एक्टिविटी फीस : 30 से 40 हजार रुपए
- अन्य खर्चे : 10 से 20 हजार रुपए
Published on:
30 Mar 2018 08:52 am
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