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जयपुर . राज्य में ज्यादातर निजी स्कूल अभिभावकों से 3 से लेकर 6 महीने तक की फीस अग्रिम वसूल रहे हैं। यह राशि इतनी होती है कि इसके ब्याज से ही स्टाफ की चार-पांच महीने की पगार निकल जाए। महीनों तक ब्याज का लाभ उठाने के बावजूद फीस चुकाने में अभिभावक को एक भी दिन विलम्ब हो जाए तो नोटिस थमाकर जुर्माना वसूल लिया जाता है।
ज्यादातर स्कूल अभिभावकों पर दबाव बना रहे हैं कि फीस तिमाही या छमाही ही जमा कराई जाए। कोई अभिभावक 3 से 6 महीने की फीस एक साथ देने में समर्थ न हो तो भी उसकी सुनवाई नहीं होती। उलटे जवाब मिलता है कि फीस जमा कराएं, अन्यथा बच्चे की टीसी ले जाएं।
स्कूलों ने बनाए मनमाने नियम
कुछ वर्ष पहले तक एकसाथ फीस जमा कराने पर छूट का विकल्प दिया जाता था। अब स्कूलों ने तीन व छह महीने की फीस एकसाथ लेने का मनमाना नियम बना लिया है। तीन महीने की फीस एकसाथ लेने के बावजूद कई स्कूल साल के बाकी महीनों के चैक भी एडवांस ले रहे हैं।
लूट का खेल ऐसा भी
- नर्सरी कक्षा की 6 माह की फीस 41 हजार रुपए तक, जबकि एक महीने की फीस केवल 6830 रुपए।
- दूसरी कक्षा की 3 महीने की फीस 15 हजार से 35 हजार रुपए तक, मगर एक महीने की फीस 5834 रुपए।
- नौवीं व दसवीं कक्षा की 6 महीने की फीस ली जा रही है 70-80 हजार रुपए।
ऐसे समझें ब्याज का गणित
(मध्यम स्तर के स्कूल में यदि बच्चों की संख्या 1000 है तो)
- फीस : 49650 रुपए प्रति छमाही
- एक महीना छोड़ दें तो 5 महीने की अग्रिम राशि : 41375 रुपए
- ब्याद दर : 7 प्रतिशत
- एक बच्चे की फीस पर 5 माह का ब्याज : 1207 रुपए।
- यानी वर्षभर में एक छात्र की फीस से ब्याज कमाया : 2414 रुपए
- स्कूल के कुल छात्रों की अग्रिम फीस पर केवल ब्याज से कमाए : 24 लाख 14 हजार रुपए
ब्याज से यूं निकल रही पगार
(स्कूल में 20 हजार रुपए प्रतिमाह के हिसाब से 30 शिक्षक नियुक्त हैं तो)
- शिक्षकों का एक महीने का वेतन : 6 लाख रुपए
- बच्चों की फीस के ब्याज से निकली : शिक्षकों की 4 महीने की पगार
(यह गणित मोटे अनुमान के आधार पर है जबकि स्कूलों में प्राइमरी कक्षाओं की फीस प्रतिमाह 8-9 हजार और माध्यमिक-उच्च माध्यमिक कक्षाओं की फीस 15 हजार रुपए तक है)
Published on:
29 Mar 2018 10:31 am
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