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गायत्री देवी बनी थीं राजस्थान की पहली महिला MP, कृष्णा कुमारी और वसुंधरा राजे के नाम पर भी है ये रिकॉर्ड

राजस्थान से पहली महिला सांसद चुनने का गौरव महारानी गायत्री देवी को हासिल हुआ। गायत्री देवी 1962 में स्वतंत्र पार्टी की टिकट पर जयपुर से चुनाव जीतीं।

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krishna kumari

जयपुर। राजस्थान से पहली महिला सांसद चुनने का गौरव महारानी गायत्री देवी को हासिल हुआ। गायत्री देवी 1962 में स्वतंत्र पार्टी की टिकट पर जयपुर से चुनाव जीतीं। इसके बाद उन्होंने दो बार और लोकसभा का चुनाव जीता। सबसे ज्यादा बार संसद पहुंचने का रिकॉर्ड पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के नाम है। वे पांच बार लोकसभा चुनाव जीत चुकी हैं। इस कड़ी में डॉ. गिरिजा व्यास चार चुनाव जीत कर दूसरे नंबर पर है।

2019 में तीन महिलाओं ने चुनाव जीता
आजादी के बाद 2019 तक हुए आम चुनाव में प्रदेश से कुल 31 महिलाएं संसद पहुंच पाईं। लोकसभा चुनाव 2018 में राज्य में तीन महिलाएं चुनाव जीतने में सफल रही। इनमें पूर्व मंत्री जसकौर मीणा दौसा, पूर्व विधायक दीया कुमारी राजसमंद तथा पूर्व सांसद गंगाराम कोली की पुत्रवधु रंजीता कोली भरतपुर संसदीय क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रत्याशी के रुप में चुनाव जीता।

वसुंधरा राजे सर्वाधिक पांच बार लोकसभा पहुंचीं

जसकौर मीणा वर्ष 1999 में सवाईमाधोपुर से भाजपा प्रत्याशी के रुप में सांसद रह चुकी हैं, जबकि तीन बार सांसद रही जयपुर की पूर्व महारानी गायत्री देवी की पोती दीया कुमारी एवं रंजीता कुमारी ने पहली बार लोकसभा का चुनाव जीता है। प्रदेश में अब तक हुए विभिन्न लोकसभा चुनावों में 31 महिलाओं ने बाजी मारी, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भाजपा प्रत्याशी के रुप में सर्वाधिक पांच बार लोकसभा पहुंची।

राजे ने झालावाड़ लोकसभा क्षेत्र से वर्ष 1989 से 1999 तक लगातार पांच चुनावों में अपनी जीत दर्ज कराई। पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास ने कांग्रेस उम्मीदवार के रुप में इन चुनावों में जीत का चौका लगाया है। उन्होंने वर्ष 1991, 1996, 1999 में उदयपुर तथा 2009 में चित्तौडगढ़ से लोकसभा चुनाव जीता।

इसी तरह गायत्री देवी ने जयपुर संसदीय क्षेत्र से स्वतंत्र पार्टी के प्रत्याशी के रुप में वर्ष 1962 से 1971 तक लगातार तीन बार चुनाव में जीत हासिल की। कांग्रेस की निर्मला कुमारी ने चित्तौडगढ़ से वर्ष 1980 में (कांग्रेसआई) तथा 1984 में कांग्रेस उम्मीदवार के रुप में चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंची। इसी प्रकार ऊषा देवी ने सवाईमाधोपुर (सुरक्षित) सीट पर वर्ष 1996 एवं 1998 में कांग्रेस प्रत्याशी के रुप में चुनाव लड़कर जीत हासिल की, जबकि 14 महिलाएं पहली बार लोकसभा पहुंची।

2009 में ज्योति मिर्धा ने नागौर से चुनाव जीता

वर्ष 1971 में जोधपुर की पूर्व महारानी कृष्णा कुमारी ने जोधपुर से निर्दलीय, 1984 में पूर्व मुख्यमंत्री मोहन लाल सुखाड़यिा की पत्नी इंदुबाला सुखाड़िया उदयपुर से कांग्रेस, वर्ष 1991 में पूर्व महारानी महेन्द्रा कुमारी अलवर से भाजपा, पूर्व पर्यटन मंत्री कृष्णेन्द्र कौर (दीपी) भरतपुर से भाजपा, वर्ष 1996 में पूर्व महारानी दिव्या सिंह भरतपुर से भाजपा, वर्ष 1998 में कांग्रेस की पूर्व महिला अध्यक्ष प्रभा ठाकुर अजमेर से कांग्रेस, वर्ष 1999 में जसकौर मीणा सवाईमाधोपुर से भाजपा, वर्ष 2004 में राज्य में पूर्व मंत्री किरण माहेश्वरी उदयपुर से भाजपा एवु सुशीला जालौर से भाजपा, वर्ष 2009 में ज्योति मिर्धा नागौर से कांग्रेस एवं चन्द्रेश कुमारी जोधपुर से कांग्रेस तथा वर्ष 2014 के सोलहवीं लोकसभा चुनाव में संतोष अहलावत झुंझुनूं संसदीय क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार के रुप में चुनाव जीता। इस बार दीया कुमारी एवं रंजीता कोली पहली बार लोकसभा चुनाव जीता।

जब किसी भी महिला प्रत्याशी ने चुनाव नहीं लड़ा
अब तक हुए सत्रह लोकसभा चुनावों में वर्ष 1957 में दूसरी एवं वर्ष 1977 छठी लोकसभा चुनाव में एक भी महिला प्रत्याशी ने चुनाव नहीं लड़ा। इस दौरान 203 महिला प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा, जिनमें वे महिलाएं भी शामिल हैं जिन्होंने एक से अधिक बार चुनाव लड़ा। इन चुनावों में कांग्रेस ने सबसे अधिक 31 महिलाओं को चुनाव मैदान में उतारा जबकि भाजपा ने 22 महिलाओं को चुनाव लडऩे का मौका दिया। इस दौरान भाजपा महिला प्रत्याशियों ने 15 तथा कांग्रेस महिला उम्मीदवारों ने 12 बार चुनाव जीता जबकि स्वतंत्र पार्टी ने तीन तथा एक निर्दलीय उम्मीदवार ने बाजी मारी।

पहले चुनाव में दो महिलाओं ने चुनाव लड़ा
राज्य में पहले लोकसभा चुनाव में केवल दो महिलाओं ने चुनाव लड़ा। जिसमें जनसंघ की रानी देवी भार्गव एवं निर्दलीय शारदा बाई दोनों ही अपनी जमानत नहीं बचा पाई। इसके बाद तीसरी लोकसभा के चुनाव में छह महिलाओं ने चुनाव लड़ा उनमें एक महिला ने चुनाव जीता, जबकि 1967 में दो महिलाओं में एक, वर्ष 1971 में चार में दो, 1980 में पांच में एक, 1989 में छह में दो, 1989 में छह में एक, 1991 में चौदह में केवल दो, 1996 में पच्चीस में चार, 1998 में बीस में तीन 1999 में पंद्रह में तीन, 2004 में सत्रह में दो, 2009 में इक्कतीस में तीन तथा वर्ष 2014 में 27 महिला प्रत्याशियों में केवल एक महिला ही चुनाव जीत सकी।