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200 मिट्रिट टन अफीम के लिए 45000 पट्टे, निगरानी के लिए 4 विभाग, तस्करी रोकने में सब नाकाम

तस्करी से मोटी कमाई के फेर में लाखों परिवारों को कर रहे बर्बाद सरकार खुद उगाए अफीम तो रुके तस्करी
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Opium

मुकेश शर्मा

जयपुर.

अफीम पैदावार से हो रही मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए चार सरकारी महकमे जुटे हैं। इसके बावजूद मादक पदार्थों की तस्करी रुकने का नाम नहीं ले रही। ग्वालियर स्थित नारकोटिक्स ब्यूरो मुख्यालय सूत्रों के मुताबिक, देशभर में और निर्यात होने वाली कुल अफीम की पैदावार हर वर्ष 200 मिट्रिट टन है। इसके लिए लिए किसानों को 45000 पट्टे जारी किए जाते हैं। इतना ही नहीं, देश में 90 फीसदी अफीम की पैदावार राजस्थान और मध्यप्रदेश में ही होती है। सूत्रों के मुताबिक, अफीम और इसके डोडा पोस्त की तस्करी भी इन दो राज्यों में सबसे अधिक हो रही है। हाल ही चित्तौडगढ़़ के बेगू विधायक राजेन्द्र सिंह विधुड़ी को 50 लाख रुपए की घूस देने का मामला सामने आया। इसके बाद पत्रिका ने अफीम पैदावार पर पड़ताल की तो यह हकीकत सामने आई। गौरतलब है कि एक के बाद एक तस्करी से मिलने वाली मोटी रकम का खुलासा होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। जबकि मादक पदार्थ तस्करी ने लाखों परिवारों में नशे की लत लगा बर्बाद कर दिया है।

10 हजार वर्गमीटर का एक पट्टा

नारकोटिक्स ब्यूरो मुख्यालय के मुताबिक, एक पट्टा 10 हजार वर्ग मीटर का होता है। 45 हजार पट्टों से पैदा होने वाली अफीम मोरफिन के लिए देश में काम लेने के साथ अन्य देशों को भी सप्लाई की जाती है।

भारत में चीरा लगाकर निकालते, अन्य

नारकोटिक्स ब्यूरो के मुताबिक, भारत में आज भी अफीम का दूध डोडा में चीरा लगाकर निकालते हैं। इस प्रक्रिया में अवैध अफीम भी तैयार की जाती है। जबकि अन्य देशों में डोडा को मशीन में डालकर दूध निकालते हैं। इससे मशीन में दूध पूरा दूध तैयार होता है और उसकी मात्रा का भी पता रहता है। भारत में भी विदेशों में अपनाई जाने वाली तकनीक का इस्तेमाल कर इसकी तस्करी पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

ऐसे भी रोकी जा सकती तस्करी

पुलिस और नारकोटिक्स विभाग से जुड़े कुछ अधिकारियों ने नाम नहीं उजागर करने की शर्त पर बताया कि मादक पदार्थ तस्करी को रोकने के लिए सरकार को अपने स्तर पर अफीम की खेती करे। किसानों को अन्य खेती के लिए प्रोत्साहित करे। जबकि अफीम पैदावार क्षेत्र में बड़ी संख्या में सरकारी भूमि है, वहां अफीम की खेती करवाए। इससे सरकार चाहेगी,उतनी अफीम की खेती करवा सकेगी।

तस्करों से इन विभागों की मिलीभगत से हो रही तस्करी

1. नारकोटिक्स ब्यूरो : अफीम की खेती तय मात्रा में ही करवाने की जिम्मेदारी

2. नारकोटिक्स कन्ट्रोल ब्यूरो : अवैध अफीम पैदावार को रोकने की जिम्मेदारी

3. आबकारी : डोडा चूरा का लाइसेंस देने के साथ अवैध मादक पदार्थ पर शिकंजा कसने के साथ कारवाई करने की जिम्मेदारी

4. पुलिस : किसी भी प्रकार के अवैध मादक पदार्थ की तस्करी, बेचान को रोकने की जिम्मेदारी