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फिल्म पद्मावती रिलीज़ को लेकर आखिर बन गई सहमति! जानें भंसाली ने राजपूतों की किन मांगों को माना

Padmavati Film Release Controversy: संजय लीला भंसाली राजपूत संगठनों को फिल्म दिखाने के लिए सहमत हो गए हैं।
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जयपुर

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Nakul Devarshi

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Updated: 14 Nov 2017, 8:30 AM IST

padmavati release sanjay leela bhansali

जयपुर/मुंबई।

बहुचर्चित विवादास्पद फिल्म 'पद्मावती' को एक दिसंबर को प्रदर्शित करने के पहले निर्माता-निर्देशक संजय लीला भंसाली राजपूत संगठनों को फिल्म दिखाने के लिए सहमत हो गए हैं। अखंड राजपूताना सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरपी सिंह ने सोमवार को यहां यह दावा करते हुए कहा कि फिल्म देखने के बाद ही पता चलेगा कि फिल्म में राजपूत समाज और रानी पद्मावती की मर्यादा और मान-सम्मान का कितना ख्याल रखा गया है, जैसा कि भंसाली दावा कर रहे हैं।

फिल्म में कुछ भी तथ्य से परे, राजपूत समाज की मर्यादा के विपरीत और आपत्तिजनक हुआ तो उसे फिल्म से हटाना ही होगा, तभी फिल्म रिलीज़ होगी।


... इधर केन्द्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री बोले- पद्मिनी के चरित्र से न हो खिलवाड़
पद्मिनी को पूरा देश बहुत सम्मान के साथ देखता है, ऐसे में किसी फिल्म में उनके चरित्र से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। जन भावनाओं का सम्मान करते हुए ही कोई काम होना चाहिए। केन्द्रीय मानव संसाधन राज्यमंत्री सत्यपाल सिंह मलिक ने सोमवार को यहां चित्तोड़गढ़ के सर्किट हाउस में मीडिया के सवाल पर यह बात कही।

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पद्मिनी फिल्म के विरोध के सवाल पर उन्होंने कहा कि फिल्में जो होती है, यह नहीं कहा जा सकता कि वे इतिहास पर आधारित होती है, लेकिन प्रत्येक तत्व उसमें सही आता है, यह नहीं होता। जहां तक इतिहास और रानी पद्मिनी का सवाल है, उसके लिए फिल्म के डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और काम करने वाले कलाकार है, उनको भी चाहिए कि जिस रानी पद्मिनी को पूरा देश जिस सम्मान के साथ देखता है, उनके चरित्र के साथ कोई खिलवाड़ नहीं हो। लोगों की जन भावनाओं का सम्मान किया जाए और उसी के हिसाब से काम किया जाए।

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धरना जारी रहा
मेवाड़ की महारानी पद्मिनी के जीवन पर आधारित संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती के खिलाफ चित्तौडगढ मे सर्वसमाज की ओर से दुर्ग के प्रवेश द्वार पाडनपोल पर पांचवे दिन सोमवार को भी अनिश्चितकालीन धरना जारी रहा। धरना स्थल पर सर्व समाज के साथ सिख समाज व डांगी, पटेल, युवा जाग्रति संस्थान चित्तौडग़ढ़ के सदस्यों द्वारा धरना स्थल पर शामिल होकर इसका समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि महारानी पद्मावती केवल राजपूत समाज ही नही होकर सर्व हिन्दू समाज का गौरव है। सांसद सीपी जोशी ने भी धरनास्थल पर पहुंच कर फिल्म पर रोक लगाने की मांग को समर्थन दिया। सर्व समाज की बैठक में निर्णय लिया गया कि पद्मावती फिल्म के बारे विरोधाभासी बयान देने वाले नेताओं का मंगलवार को दोपहर 12 बजे पुतला दहन किया जाएगा।

राज्यभर में समाज-संगठनों ने किया विरोध प्रदर्शन
रिलीज होने को तैयार संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावती' को लेकर प्रदेश में आक्रोश बढ़ रहा है। समाज-संगठनों और लोगों ने सोमवार को भी जगह-जगह रैली-प्रदर्शन कर विरोध जताया। विवादित हटाने या फिल्म पर रोक लगाने की मांग की। साथ ही चेताया कि विवादित हिस्से नहीं हटे तो फिल्म रिलीज नहीं होने दी जाएगी। उदयपुर के वल्लभनगर विधायक रणधीर सिंह भींडर ने तो यहां तक कह दिया कि मां पर आंच आई तो कुछ नहीं देखेंगे।


जयपुर में श्री राजपूत करणी सेना की अगुवाई में विभिन्न समाजों के लोगों ने सोमवार को जिला कलक्टर कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। सेना ने कलक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर फिïल्म पर रोक लगाने की मांग की। सेना के प्रदेशाध्यक्ष अजीत सिंह मामडोली ने कहा, लोगों की भावनाओं को दरकिनार कर फिल्म रिलीज की गई तो देशभर में प्रबल विरोध किया जाएगा। सरकार को चाहिए कि विवादित दृश्य हटवाए, अन्यथा फिल्म को ही प्रतिबंधित करे।

सिख समाज ने कहा, विरोध उचित
बढ़ते विरोध के बीच सोमवार को राजस्थान सिख समाज ने भी इतिहास से छेड़छाड़ को अनुचित बताया। राजापार्क में हुई बैठक में सिख समाज के अध्यक्ष अजयपाल सिंह ने कहा, फिल्म निर्माता-निर्देशक स्वार्थवश इतिहास से छेड़छाड़ करते रहे हैं। पद्मावती में भी यही किया गया है। राजस्थान सिख समाज यूथ विंग के अध्यक्ष देवेंद्रसिंह शंटी ने कहा, धर्म-समाज और इतिहास से छेड़छाड़ का विरोध करना उचित है।


रिलीज रोकें, कमेटी बनाएं : लोटवाड़ा
राजपूत सभा भवन में पत्रकारों से बातचीत में श्री राजपूत सभा अध्यक्ष गिरिराज सिंह लोटवाड़ा ने कहा, सेंसर बोर्ड फिल्मों का केवल वर्गीकरण करता है, ऐतिहासिक तथ्योंं को प्रमाणित नहीं करता। फिल्म के प्रमाणीकरण के लिए पहले रिटायर्ड जज, इतिहास प्रोफेसर, सामाजिक संस्थाओं के लोगों, संबंधित पूर्व राजघराने के सदस्य को शामिल कर कमेटी बनाई जाए। कमेटी की सहमति पर ही फिल्म रिलीज की जाए। फिल्म में घूमर का प्रदर्शन डांस के रूप में किया गया है, जो भी गलत है।


पद्मावती फिल्म अभी सेंसर बोर्ड ने पास नहीं की है। विरोध में मिले ज्ञापन कला एवं संस्कृति विभाग को भेजे गए हैं। फिल्म में ऐसे तथ्य देखने को कहा गया है, जिनसे इतिहास के साथ छेड़छाड़ हो रही है। पद्मिनी व्यक्ति या जाति की नहीं, सम्पूर्ण राजस्थान की पहचान हैं। राजस्थान का इतिहास उनसे गौरवान्वित है। ऐसा दुनिया में कोई उदाहरण नहीं मिलता। उन्हें लेकर कोई छींटाकशी नहीं होनी चाहिए।
- गुलाबचन्द कटारिया, गृहमंत्री