
जयपुर। 'पाक़ीज़ा' फ़िल्म का गाने 'जिसने अशर्फी ग़ज़ दीना दुपट्टा मेरा...इन्हीं लोगों ने...' में मीना कुमारी ने जो दमकता दुपट्टा ओढ़ नृत्य किया था, उस अशर्फी ग़ज़ दुपट्टे को बनाने वाला कारीगर इन दिनों गुलाबी नगरी में है। इस कारीगर का नाम है अब्दुल हक़ीम खलीफा।
वाकई अपने काम के 'ख़लीफ़ा' ही तो हैं अब्दुल हक़ीम। इन्होंने पाक़ीज़ा का वह भव्य दुपट्टा 25 दिन की कड़ी मेहनत के बाद तैयार किया था। इसमें उन्होंने 200 अशर्फियां बारीक तार में जड़ अपने फन का लोहा तमाम कद्रदानों में मनवाया था।
दरअसल, इन दिनों जवाहर कला केंद्र के शिल्पग्राम में 'चंदेरी उत्सव' में लगी 'मृगनयनी प्रदर्शनी' में आए खलीफा जैसे ही कई 'चंदेरी साड़ी-दुपट्टा' कारीगरों की मेहनत की चमक शहर के घर-घर तक पहुंच रही है। प्रदर्शनी में आनेवाले लोग, खासकर महिलाएं तो चंदेरी साड़ियों, दुपट्टों आदि की कायल हो चुकी हैं।
प्रदर्शनी प्रभारी एम.एल. शर्मा बताते हैं कि मध्यप्रदेश हस्तशिल्प एवं हथकरघा ने जवाहर कला केंद्र के सहयोग से यह प्रदर्शनी लगाई है।
शर्मा बताते हैं कि मध्यप्रदेश के छोटे से चंदेरी क्षेत्र का नाम इसी चंदेरी कारीगरी ने दुनियाभर में चमका दिया है। चंदेरी साड़ियां और दुपट्टे जहां कई राजघरानों की रानियों-महारानियों की पहली पसंद है, वहीं आम महिलाओं में भी खासी लोकप्रिय है।
चन्देरी साड़ियां तीन डिज़ाइन दो चश्मी, जुगनू बूटी और मेहंदी भरे हाथ में बंटी हैं। सबसे बड़ी खूबी यह है कि ये साड़ियां आमलोगों का भी बरबस ही ध्यान खींच लेती हैं, पारखियों की तो बात ही क्या।
दो चश्मी
जो चन्देरी साड़ियां दो चश्मी डिज़ाइन में बनती हैं, वो एक तरफ से देखने पर हरी तो दूसरी ओर गुलाबी दिखती हैं। बताते हैं लन्दन में जब लोग इसे देख हैरत में पड़ गए, तब कारीगर ने उन्हें दो चश्मे लगाकर देखने की हिदायत दी। कहते हैं तभी से इस डिजाइन का नाम दो चश्मी हो गया।
जुगनू बूटी
इस डिज़ाइन की खूबी यह है कि एक तो इसमें दो हज़ार बूटी होती हैं, दूसरे इन दमकती बूटियों के कारण यह साड़ी जुगनू की तरह चमकती है। ज़ाहिर है, महिलाएं खासतौर से इसे शादी समारोह में इसको पहनना पसंद करती हैं।
मेहंदी भरे हाथ
इस डिज़ाइन की साड़ी के बॉर्डर में मेहंदी रचे हाथ बने होते हैं। इस डिज़ाइन की मांग इसकी खूबसूरती की वजह से बहुत है।
लगता है काला टीका
चन्देरी साड़ियों की खूबसूरती का आलम यह है कि जब इसे बनाते हैं, तब कुछ इंच बनते ही इस पर कारीगर काला टीका लगा देता है, ताकि औरों के साथ ही खुद की भी नज़र न लगे।
Published on:
14 Nov 2019 09:22 pm
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