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Barmer Pandal Collapse Mishap: स्टोन बिज़नस छोड़कर राम कथा सुनाने लगे मुरलीधर, विदेशों तक में हैं ‘रसिक’, जाने सब कुछ

Pandal Collapse in Barmer Rajasthan: स्टोन बिज़नस छोड़कर राम कथा सुनाने लगे मुरलीधर, विदेशों तक में हैं 'रसिक', जाने सब कुछ

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Pandal Collapse in Jasol Barmer Rajasthan, Ram Katha Orator Murlidhar Biography

जयपुर।

बाड़मेर के जसोल में पांडाल गिरने से हुए हादसे ( Pandal Collapse in Jasol Barmer Rajasthan ) में मृतक संख्या 15 पहुंच गई है। वहीं अभी भी कई लोग जोधपुर और बाड़मेर के विभिन्न अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं। ये हादसा उस समय हुआ जब वहां जाने-माने कथा वाचक मुरलीधर ( Ram Katha Orator Murlidhar ) की राम कथा का आयोजन हो रहा था। राम कथा सुनने के लिए न सिर्फ राजस्थान से बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों से लोग पहुंचे थे। किसी को अंदाज़ा तक नहीं था कि राम कथा उनके लिए सबसे बड़े और दर्दनाक हादसे में तब्दील हो जाएगा।


जानिये कौन हैं कथा वाचक मुरलीधर ( Ram Katha Orator Murlidhar Biography )
मुरलीधर देश के जाने-पहचाने कथा वाचकों में से एक हैं। उनके श्रीमुख से राम कथा सुनने वालों की संख्या असंख्य है। यही वजह है कि आज मुरलीधर आध्यत्मिक जगत में अपनी एक अलग ही पहचान बना चुके हैं। कथा रसिकों की माने तो उनकी प्रभावशाली और भावुकता भरी कथा शैली श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर देती है। एक बार जिसने उनकी राम कथा का श्रवण कर लिया, वह राम रस में बिभोर हुए बिना नहीं रह सकता।

जानकारी के अनुसार मुरलीधर का जन्म 13 अगस्त 1970 को गुजरात के कल्लोल गांव जिला मेहसाना में एक साधारण वैष्णव परिवार में हुआ। बताया जाता है कि उनका पूरा परिवार ही भक्ति भाव से ओत-प्रोत रहा है। बचपन में ही इन्हें वैष्णव संत जमनादास जी का सानिध्य मिल गया। इस तरह से संत मुरलीधर को जन्म से ही आध्यात्मिक संस्कार विरासत में मिल गए।


बताया जाता है कि मुरलीधर जब किशोरावस्था में थे तब ही परिवार सहित स्थायी रूप से निवास के लिए गुजरात से जोधपुर राजस्थान आ गया। जोधपुर रहकर ही उन्होंने अपनी स्नातकोत्तर शिक्षा ग्रहण की। उन्हें हिंदी, गुजराती, मारवाड़ी व अन्य स्थानीय भाषाओं में पूर्ण पारंगतता हासिल है। मुरलीधर का विवाह धार्मिक प्रवृत्ति वाली महिला मीना देवी के साथ 1991 में संपन्न हुआ।


स्टोन बिज़नस से जुड़े मुरलीधर
मुरलीधर ने युवावस्था में ही व्यवसाय के रूप में 1992 में पत्थर का व्यापार जोधपुर से शुरू किया। लेकिन मन और आत्मा अध्यात्म से ही जुड़ा रहा। कथा वाचन में उनकी रूचि बढ़ती रही जिसकी वजह से उन्होंने व्यवसाय को विराम दे दिया और पूरी तरह से कथा वाचन में ही रम गए। कथा वाचक मुरलीधर से कथा का रसपान करने ना केवल भारत से बल्कि विदेशों में भी श्रोता पहुंचते हैं।

कथा वाचक ने 'पत्रिका' को बताई आंखों-देखी
बाड़मेर के जसोल में रामकथा के दौरान जो घटना घटी उससे मैं व्यथित हूं। कथा शुरुआत के समय हल्की हवा शुरू हुई और थोड़ी देर में छींटे आने लगे थे। तो मैंने श्रद्धालुओं से कहा कि परमात्मा ने कृपा कि है गर्मी से राहत मिलेगी और मिट्टी भी नहीं उड़ेगी। लेकिन कुछ क्षणों में जोर से बवंडर आया तो अचानक पांडाल उडऩे लगा तो मैंने उपस्थित लोगों से अपील की वे पांडाल को तुरंत खाली कर दें मैं कथा को विराम करता हूं। मेरा इतना ही कहना था कि तब तक पांडाल पूरा ही ऊपर उठ गया। मैंने लोगों से कहा भागिए पांडाल छोड़ दीजिए, लेकिन लोग पांडाल छोडऩे की बजाए पुन: अंदर आने लगे।

परमात्मा की कृपा की भीड़ ज्यादा नहीं

परमात्मा की कृपा ही थी कि कथा शुरू हुए, एकाध घंटा हुआ था। इसीलिए ज्यादा श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं थी। यही शाम को 5 बजे घटना होती तो नुकसान ज्यादा होता। शायद परमात्मा की यही इच्छा रही होगी। मानस के अनन्य भक्त जिन्हें परमात्मा ने अपने पास बुला लिया और मैं चाह कर भी कुछ नहीं कर पाया। मैं कथा पांडाल में ही खड़ा सब कुछ स्तब्ध देखता रहा। जब तक एक-एक घायल को पांडाल से निकाल कर अस्पताल तक नहीं पहुंचाया मैं वही रहा।

परिवार होता तो दुख नहीं होता

पांडाल में मेरा परिवार का होता मुझे इतना दुख नहीं होता लेकिन जो भगवान की कथा श्रवण करने आए थे, परमात्मा ने पता नहीं यह क्यूं किया। जो संसार से चले गए उनके परिवार से यह कहना चाहूंगा कि उनकी दुख की घड़ी में उनके साथ हूं। मैं और क्या कर सकता हूं। परमात्मा से प्रार्थना करता हूं दिवंगत भक्तों को अपने चरणों में स्थान दे। कथा की अनुमति के बारे में कुछ नहीं कह सकता मुझे इसका पता नहीं है। मैं तो सीधा कथा स्थल पर कथा वाचन करने ही जाता हूं। घटना के समय जिला पुलिस प्रशासन वहां मौजूद था।

( जैसा कि कथावाचक संत मुरलीधर ने पत्रिका को बताया )