
जयपुर। हर साल की तरह इस बार भी अभिभावक फीस वृद्धि के खिलाफ धरना प्रदर्शन करने को मजबूर है। नोएडा, गाजियाबाद, राजस्थान समेत हर जगह पैरेंट्स इस मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद करने में जुटे है। हर साल प्रदर्शन के बाद भी सरकार और प्रशासनिक अफसर पैरेंट्स का दर्द सुनने को तैयार नहीं होते। अक्सर फीस वृद्धि को लेकर स्कूलों के तर्क के सामने पैरेंट्स की समस्या फीकी ही पड़ जाती हैं। लेकिन इस बार अभिभावकों के दर्द को सरकार सुनकर उनका हल निकालती नजर आ रही है। हाल ही में निजी स्कूलों में फीस वृद्धि के खिलाफ आक्रोश बढ़ता देख सरकार ने सख्त कदम उठाना शुरु कर दिया है। शिक्षा विभाग ने राजधानी में एक निजी स्कूल की फीस वृद्धि स्थगित कर दी है। यह संभवत: ऐसी पहली कार्रवाई है। मामला प्रताप नगर केएम मुंशी मार्ग स्थित स्कूल का है। स्कूल की इन दोनें शाखाओं में 25 फीसदी से अधिक फीस बढ़ाई गई। अभिभावकों ने प्रदर्शन कर शिक्षा मंत्री को शिकायत दी। विभाग ने कमेटी बनाकर जांच की तो सामने आया कि स्कूल ने फीस एक्ट की पालना नहीं की और मनमर्जी से फीस बढ़ा दी। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी रतन सिंह यादव ने स्कूल को पत्र जारी किया है। इसमें कहा है कि फीस का निर्धारण फीस एक्ट के प्रावधानों के अनुसार करें। तब तक सत्र 2018-19 में की गई फीस वृद्धि स्थगित रहेगी।
आपको बता दें कि हर साल स्कूल मैनेजमेंट मनमाफिक तरीके से फीस में वृद्धि कर देते हैं। फीस वृद्धि को लेकर पैरेंट्स और एसोसिएशन के पदाधिकारियों को स्कूलों के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करना पडता हैं। उसके बाद भी कोई हल नहीं निकलता हैं। हर साल बढ़ने वाली फीस के पीछे स्कूलों का तर्क स्टूडेंट्स को क्वालिटी एजूकेशन की सुविधा मुहैया कराना होता हैं। वहीं अगर पैरेंट्स की माने तो हर साल फीस बढ़ती हैं, लेकिन सुविधाएं नहीं बढ़ाई जाती हैं। गौरतलब है कि फीस के साथ-साथ बुक्स और यूनिफार्म खरीदना भी पैरेंट्स के लिए परेशानी का सबब बनता हैं। हर साल इनके रेट में भी 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी जाती हैं। रुपये कमाने के चक्कर में हर साल स्कूल मैनेजमेंट यूनिफार्म के लोगों में बदलाव कर देते हैं।
Published on:
21 Apr 2018 02:14 pm
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