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मरीज भगवान भरोसे! बेखौफ डॉक्टर, न कोर्ट की चिंता, न सरकार की

अस्पतालों में पांचवें दिन भी चिकित्सा व्यवस्थाएं बेपटरी...

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जयपुर। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी आज सुबह प्रदेश के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र से लेकर मेडिकल कॉलेज तक न तो सेवारत चिकित्सक काम पर लौटे और न ही मेडिकल कॉलेजों के रेजीडेंट। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मंगलवार को साढ़े पांच हजार सेवारत चिकित्सक ड्यूटी पर नहीं थे, आज पांचवे दिन भी प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाएं बेपटरी रही और मरीज इलाज के लिए कराहते रहे। प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में आज भी ऑपरेशन टाल दिए गए। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को इलाज नहीं मिलने से निजी अस्पतालों में महंगा इलाज लेने पर मजबूर हो रहे हैं और अपनी जेब कटा रहे हैं। उधर हाईकोर्ट के आदेश के बाद सेवारत चिकित्सक संघ के पदाधिकारी सोशल मीडिया से अचानक गायब हो गए हैं।

हाईकोर्ट ने तत्काल काम पर लौटने का दिया था आदेश
मंगलवार को हाईकोर्ट में हड़ताली डॉक्टरों को तत्काल ड्यूटी पर आने के आदेश दिए और नहीं आने पर अवमानना की कार्यवाही झेलने की चेतावनी भी दी। लेकिन सेवारत चिकित्सक काम पर नहीं लौटे। सरकारी अस्पतालों में वैकल्पिक इंतजाम भी धराशायी हो गए हैं, मरीज इलाज नहीं मिलने पर कराह रहे हैं।

इंटर्न डॉक्टरों को वार्डों में लगाया जा रहा
सेवारत चिकित्सकों के समर्थन में मेडिकल कॉलेजों के रेजीडेंट भी हडताल पर चले जाने के कारण मेडिकल कॉलेजों में इलाज भी बीमार हो गया है। बड़े ऑपरेशन टाले जा रहे हैं और आउटडोर में मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा है। हालांकि एसएमएस अस्पताल के धन्वंतरि आउटडोर में मेडिकल कॉलेज से नॉन क्लिनिकल चिकित्सकों की तैनाती की गई है और इंटर्न डॉक्टरों को वार्डों में लगाया जा रहा है।

रेजीडेंट्स को भी डर नहीं
एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. यूएस अग्रवाल ने हड़ताल पर गए रेजीडेंट्स को आज सुबह 9 बजे तक काम पर लौटने की चेतावनी दी थी, लेकिन कोई भी रेजीडेंट सुबह 9 बजे तक काम पर नहीं लौटा। प्राचार्य ने बताया कि सुबह 9 बजे तक अस्पतालों में रेजीडेंट ने उपस्थिति नहीं दी है। सभी विभागों से सूचनाएं मंगा रहे हैं और ड्यूटी पर नहीं लौटने वाले रेजीडेंट्स के खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार को लिखा जाएगा।

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