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Patrika Book Fair: पुस्तकों की महक में थिरके शब्द… पत्रिका बुक फेयर के सतरंगी रंगों से सजा शिल्पग्राम; आज ये सत्र खास

Patrika Book fair: पुस्तकों की महक और सतरंगी रंगों से सजा शिल्पग्राम। विभिन्न स्टॉल्स पर अपनी पसंदीदा किताबों को ढूंढ़ते युवा।

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जयपुर। पुस्तकों की महक और सतरंगी रंगों से सजा शिल्पग्राम। विभिन्न स्टॉल्स पर अपनी पसंदीदा किताबों को ढूंढ़ते युवा। खूबसूरत लोकेशन के साथ कैमरे में फोटो कैद करते लोग। लेखकों से मिलने का इंतजार और उनसे जुड़ी जानकारी लेते पुस्तक प्रेमी। शनिवार को जवाहर कला केन्द्र में कुछ इसी तरह का माहौल था। मौका था राजस्थान पत्रिका की ओर से शुरू हुए पत्रिका बुक फेयर का।

इस नौ दिवसीय आयोजन में दो लाख से अधिक लेखकों की पुस्तकें प्रदर्शित की गई हैं। यहां लोग कई तरह की फन एक्टिविटी के साथ फूड कोर्ट में लजीज व्यंजनों का भी आनंद ले रहे हैं। आयोजन में शनिवार को न सिर्फ युवा वर्ग का उत्साह दिखा, बल्कि बच्चे और बुजुर्ग भी अपनी पसंद की किताबें खरीदते नजर आए।

फेयर में प्रमुख लेखकों, कवियों और अनुवादकों के साथ साहित्यिक चर्चाएं और इंटरेक्टिव सत्र भी आयोजित होंगे। इस मौके पर कई किताबों का विमोचन होगा। फेयर 23 फरवरी तक चलेगा। फेयर में प्रतिभा को निखारने और बेहतर प्लेटफॉर्म पर आने का भी मौका मिलेेगा।

गुलाब कोठारी की इन दो पुस्तकों पर होगी चर्चा

मेरे भीतर मैं

यह शरीर मेरा है, मैं इसके भीतर निवास करता हूं। शरीर वाहन है, भीतर संचालक आत्मा है। ब्रह्म का ही अंश है। पंचाग्नि के माध्यम से शरीर में जीव प्रवेश करता है। आयुपर्यन्त कर्मफल भोगता है। नए कर्म कर पुन: जन्म लेने को चौरासी लाख प्रकार के शरीर हैं। ब्रह्म का यात्रा मार्ग है। चर-अचर, जड़-चेतन सबमें वही एक व्याप्त है। सृष्टि ऋत से सत्य रूप, सूक्ष्म से स्थूल रूप धारण करती है तब उसमें ब्रह्माण्ड के विभिन्न तत्त्व जुड़ते जाते हैं। ‘यथाण्डे तथा पिण्डे’ के अनुरूप शरीर ब्रह्माण्ड की प्रतिकृति है।

स्त्री : देह से आगे

ब्रह्म ने स्वयं के विस्तार के निमित्त केवल एक ही प्राणी उत्पन्न किया जो बाहर से स्थूल और भीतर दिव्यता लिए है, वह स्त्री है- मादा है। शरीर से पशु और हृदय से महामाया। ब्रह्म की भांति वह भी नित्य है, स्रष्टा-पाता-संहर्ता है। अग्नि-सोमात्मक युगल भाव सूक्ष्म से चलकर स्थूल में आता है तो नर-मादा, स्त्री-पुरुष कहलाता है। दोनों देह नहीं, आत्मा हैं। मां, बहन, पत्नी, पुत्री सभी रूपों में स्त्री की दिव्यता नित्य है, रौद्र रूप भी उतना ही विध्वंसक है। आज हर नारी के हृदय में प्रतिष्ठित यह दिव्यता शिक्षा और संचार माध्यमों के आवरण में खो गई है। लेखक ने प्राचीन वाङ्मय के दृष्टांतों से वैज्ञानिक विवेचना कर इन आवरणों को विस्तार से खोला है। स्त्री का दिव्यता पर पड़ी पाश्चात्य जीवनशैली और दर्शन की धूल को लेखक झाड़ता है।

आज ये सत्र खास

पहला सत्र
विषय: ’स्टोरी टेलिंग’, मनोज कुमार शर्मा चर्चा करेंगे
स्थान: मानस
समय: दोपहर 3 से 4 बजे

दूसरा सत्र
विषय: ’ईको सिस्टम एंड सस्टेनेबिलिटी’, हिमांशु जांगिड़ व विवेक अग्रवाल अपनी राय रखेंगे
स्थान: सेंट्रल स्टेज
समय: शाम 4 से 5 बजे

तीसरा सत्र
विषय: ‘स्त्री देह से आगे’ पुस्तक पर इसके लेखक गुलाब कोठारी का विशिष्ट वक्तव्य होगा। शास्त्री कोसलेन्द्रदास, सुकुमार वर्मा, डॉ. श्वेता तिवारी संवाद में भाग लेंगे।
स्थान: मानस
समय: शाम 5 से 6 बजे

चौथा सत्र
विषय: ’बुक्स, आइडियाज एंड डिजिटल ईकोसिस्टम’, ओम थानवी व पवन झा चर्चा करेंगे, मॉडरेटर हरीश पाराशर होंगे
स्थान: सेंट्रल स्टेज
समय: शाम 6 से 7 बजे

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रेडियो पर आने का मिलेगा मौका

फेयर में रोजाना शाम सात से रात आठ बजे तक आरजे सूफी का शो आयोजित होगा। इसमें आरजे सूफी के साथ आपको रेडियो पर आने का भी मौका मिलेगा। रविवार शाम 7 बजे से ’ऑथर मिस्ट्री गेम: कौन है यह लेखक?’ कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें एक प्रसिद्ध लेखक का नाम छिपा दिया जाएगा और प्रतिभागियों को हां/नहीं जवाब देकर उस लेखक के नाम का अंदाजा लगाना होगा।