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Patrika National Book Fair: किताबों के बीच खुशनुमा पल; परिवारों की संडे आउटिंग का पसंदीदा स्पॉट बन रहा पत्रिका बुक फेयर

Patrika Book Fair Update: यह फेयर अब महज़ किताबें खरीदने का स्थान नहीं बल्कि परिवारों के लिए सांस्कृतिक और रचनात्मक अनुभव का केन्द्र बन गया है, जहां बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सभी ज्ञान, मनोरंजन और साहित्यिक गतिविधियों का आनंद ले रहे हैं।

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फोटो: पत्रिका

Patrika Book Fair 2025 In JKK: जयपुर शहर में पिछले कुछ वर्षों से आयोजित हो रहा पत्रिका नेशनल बुक फेयर अब केवल एक पुस्तक खरीदारी का आयोजन नहीं रह गया है बल्कि यह परिवारों के लिए एक सुखद और सांस्कृतिक अनुभव का हिस्सा बन चुका है।

जहां बच्चे, बड़े और बुजुर्ग अपनी पसंदीदा किताबों की दुनिया में खो जाते हैं और एक अच्छी पिकनिक का आनंद भी लेते हैं। यह बुक फेयर सामाजिक और सांस्कृतिक मिलन स्थल बन चुका है, जहां किताबों के साथ-साथ विचार-विमर्श, मस्ती और ज्ञानवर्धन माहौल भी देखने को मिलता है।

फेयर में सिर्फ किताबों की बिक्री ही नहीं हो रही है, बल्कि यहां चल रहे सांस्कृतिक कार्यक्रमों, वर्कशॉप्स, पैनल डिस्कशन और बच्चों के लिए कहानी सुनाने के सत्रों ने इसे एक नई पहचान दी है। लेखकों के साथ खुली चर्चा और साहित्यिक संगोष्ठियों ने इस आयोजन को और भी दिलचस्प बना दिया है। फेयर में कई परिवार ऐसे नजर आए जिन्होंने किताबों की स्टॉल्स के पास बैठकर विचार साझा किए और साहित्य पर चर्चा की।

किताबों की सूची बनाकर ला रहे

एक ओर बच्चे कॉमिक्स, कहानियां और शैक्षिक किताबें खरीद रहे थे, वहीं बड़े लोग गहन साहित्य, प्रेरक किताबें और समकालीन लेखकों के उपन्यासों में रुचि दिखा रहे थे।

500 से 3 हजार रुपए तक औसत खर्च: बुक फेयर में औसत खर्च 500 रुपए से लेकर 3 हजार रुपए तक देखा गया। कुछ परिवार बच्चों के लिए किताबें खरीद रहे थे, वहीं बड़े सदस्य गहन और ज्ञानवर्धक साहित्य का चयन कर रहे थे। एक परिवार ने बताया कि वे हर साल बुक फेयर में किताबों की सूची बनाकर लाते हैं और खरीदते हैं।

परिवार के साथ करते खरीदारी

पत्रकार कॉलोनी निवासी एक परिवार के सदस्य गौरव चौधरी ने बताया कि हम हर साल बुक फेयर में आते हैं। इस बार हमने बच्चों के लिए कुछ किताबें खरीदीं और खुद के लिए उपन्यास खरीदा है। यह फेयर परिवार के लिए अच्छा समय बिताने का तरीका बन गया है।

ज्ञान और रचनात्मकता

फेयर में आने वाले परिवारों का मानना है कि यह फेयर बच्चों के लिए प्रेरणा का काम करता है, क्योंकि यहां वे इसमें न केवल पसंदीदा किताबें पाते हैं, बल्कि नया ज्ञान और रचनात्मकता से भी जुड़ते हैं।

‘तड़का फन प्लग्ड’ सेशन: गेम्स के साथ म्यूजिक की बीट्स पर किया एंजॉय

पत्रिका नेशनल बुक फेयर के दूसरे दिन पुस्तकप्रेमियों ने विभिन्न सेशंस के साथ म्यूजिकल इवेंट में भी हिस्सा लिया। शाम को ‘तड़का फन प्लग्ड’ नामक सेशन का आयोजन हुआ, जिसे आरजे शिवांगी ने होस्ट किया। इस दौरान ‘ए टू जेड ऑफ बुक्स एंड ऑथर्स’, ‘बुक क्रिकेट’ और ‘फास्टटैग’ का आयोजन हुआ। विजेता टीम के सभी मेंबर्स को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

वहीं ‘फास्टटैग’ गेम में प्रतिभागियों ने एक वर्ड के पांच उपयोग बताने का प्रयास किया। विजेता को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। वहीं एक युवा ने ‘कलयुग में भय मृत्यु का…’ कविता सुनाकर कार्यक्रम में मौजूद पुस्तकप्रेमियों की खूब तालियां बटोरीं।

ऑडियंस भी गुनगुनाती रही गीत

कार्यक्रम में धड़क बैंड के कलाकारों ने प्रस्तुति देकर माहौल को संगीतमय कर दिया। ‘पायोजी मैंने राम रतन धन पायो… गीत से कलाकारों में परफॉर्मेंस की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने ‘आंखें ये दरिया बन-बन बहने लगी…’ गीत पेश किया। वहीं, ‘घूमर रमवा में जास्यां…’, पल्लो लटके रे म्हारो पल्लो लटके…’, ‘थारी शरारत सब जानू मैं चौधरी…’समेत कई गीतों की प्रस्तुति देकर ऑडियंस को गुनगुनाने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम में कंचन मीणा, आलोक भट्ट, राहुल मीणा समेत कई कलाकारों ने परफॉर्मेंस दी।