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Patrika National Book Fair: लोकजीवन की धड़कन ‘मेरा राजस्थान’ से खुली परंपराओं की परत, नारी शक्ति व लोकदेवों का समृद्ध वर्णन

जवाहर कला केंद्र का शिल्पग्राम में पुस्तक मेले के उद्घाटन के मौके पर पत्रिका समूह के प्रधान संपादक डॉ. गुलाब कोठारी की पुस्तक ‘मेरा राजस्थान’ पर विशेष सत्र आयोजित हुआ।

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पत्रिका समूह के प्रधान संपादक डॉ. गुलाब कोठारी की पुस्तक पर विशेष सत्र, पत्रिका फोटो

Patrika National Book Fair: जयपुर. जवाहर कला केंद्र का शिल्पग्राम शनिवार को साहित्यप्रेमियों से खचाखच भरा नजर आया। दरिया-सी बहती भीड़, संजीदा विचारों में गोते लगाते वक्ता और युवाओं की बड़ी भागीदारी ने पत्रिका नेशनल बुक फेयर के पहले दिन को खास बना दिया। पुस्तक मेले के उद्घाटन के मौके पर पत्रिका समूह के प्रधान संपादक डॉ. गुलाब कोठारी की पुस्तक ‘मेरा राजस्थान’ पर विशेष सत्र आयोजित हुआ। इसमें संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की शिक्षाविद् डॉ. ज्योत्सना शर्मा और वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र बोड़ा ने पुस्तक के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।

किताब इतिहास के बेहद करीब

सत्र की शुरुआत में राजेंद्र बोड़ा ने कहा कि किताबों से गुजरना, दुनिया के श्रेष्ठ अनुभवों से गुजरने जैसा है। पुस्तक पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि ‘मेरा राजस्थान: लोकजीवन की बानगी’ राजस्थान के लोक जीवन, संस्कृति, कला, संगीत, नृत्य, खानपान और जीवनशैली का बेहद समृद्ध दस्तावेज है, जिसमें इस भूमि की भौगोलिक विशेषताओं और परंपराओं की जीवंत झलक मिलती है। यह केवल साहित्यिक या शैक्षणिक पुस्तक नहीं, बल्कि एक स्थायी दस्तावेज है, जिसमें गहन शोध झलकता है। उन्होंने कहा कि इसमें बुनकरों, दस्तकारों और हस्तशिल्पियों के हुनर का बेहद संवेदनशील चित्रण किया गया है।

बोड़ा ने कहा कि हमने लोक कलाओं को समय के साथ खोते हुए देखा है, लेकिन यह पुस्तक उन कलाओं के इतिहास को सुरक्षित कर एक महत्वपूर्ण स्रोत बनकर सामने आई है। विकास की आड़ में जिन परंपराओं को हम पीछे छोड़ते जा रहे हैं, उनके संरक्षण की चेतना यह पुस्तक जगाती है।

प्रामाणिक शोध कार्य की तरह है यह पुस्तक

सत्र के दौरान शिक्षाविद् डॉ. ज्योत्सना शर्मा ने कहा कि डॉ. कोठारी के चिंतन में गहराई और लोक जीवन के प्रति संवेदनशीलता है। उन्होंने बताया कि पुस्तक में राजस्थान के भूगोल का विस्तृत वर्णन है, क्योंकि भूगोल ही किसी क्षेत्र की प्रकृति और संस्कृति को समझने का आधार बनता है।उन्होंने कहा कि यह पुस्तक लोक संस्कृति पर एक प्रामाणिक शोध कार्य की तरह है, जिसमें खत्म होती परंपराओं और कलाओं को संरक्षित करने का मानवीय प्रयास नजर आता है। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए भी इस पुस्तक को उपयोगी बताते हुए कहा कि यह लोककलाओं की समझ बढ़ाती है और उनसे जुड़ाव पैदा करती है।

नारी शक्ति व लोकदेवों की परंपरा का भी सार्थक वर्णन

शिक्षाविद् डॉ. ज्योत्सना शर्मा ने कहा कि पुस्तक में नारी शक्ति, उनके शौर्य, लोकदेवता गोगाजी, शीतला माता, खाटूश्यामजी, पशु मेले और महीने भर चलने वाले लोक आयोजनों का समृद्ध वर्णन है। इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि लोकदेवता गोगाजी को हिंदू और मुस्लिम, दोनों समुदायों में किस रूप में याद किया जाता है।

इतिहास को समकालीन संदर्भ से जोड़ती है

इस अवसर पर साहित्यप्रेमी प्रो. विजय कुमार वशिष्ठ ने कहा कि डॉ. गुलाब कोठारी ने अपनी रचना के माध्यम से प्राचीन इतिहास को वर्तमान संदर्भों से जोड़ने का उल्लेखनीय कार्य किया है। सत्र का संचालन वरिष्ठ पत्रकार सुकुमार वर्मा ने किया।