
rajasthan ka ran
शादाब अहमद की रिपोर्ट...
मैं सुबह कार में बैठा और जयपुर के मुस्लिम बाहुल्य रामगंज से देहात के मुस्लिम बाहुल्य इलाकों की राजनीतिक नब्ज टटोलने निकल पड़ा। यहां से मैं पंचायती राज का उदय करने वाले नागौर जिले में नमक उद्योग के लिए मशहूर नावां पहुंचा तो मुलाकात खांटी जाट रामप्रकाश चौधरी से हुई, चुनाव की चर्चा शुरू की तो वह सीधे ही किसानों के मुद्दों पर आ गए। कहने लगे सरकार ने कुछ नहीं किया, बस काम का शोर-शराबा किया है। विधायक जनता की सुनते ही नहीं हैं। उनकी बात सुनने के बाद मैं नावां के मुख्य बाजार में पहुंचा। वहां कपड़े की दुकान के बाहर चार लोग बतिया रहे थे। मैं भी उनके साथ हो लिया और उनके बीच चुनावी शिगूफा छोड़ दिया। मैंने जैसे ही कहा कि चुनाव में मुद्दा क्या रहने वाला है तो उनमें से कस्तूरमल माली कहने लगे कि नावां के अस्पताल में चिकित्सकों की कमी और गल्र्स कॉलेज का मुद्दा बनेगा। उनके यह कहते ही वहां खड़े एक युवक ने भी इसमें सहमति जता दी। जबकि वहीं बैठे ओमप्रकाश ने कहा कि यहां कोई मुद्दा नहीं है। इनको लगता होगा तो लगे, कोई बदलाव नहीं होने वाला। उनकी बहस को बढ़ता देख, मैं वहां से निकल लिया।
बाजार में ही चूड़ी की दुकान चला रहे शकील ने कहा कि कस्बे में श्रमिक बड़ी संख्या में हैं। भामाशाह से श्रमिक कार्ड नहीं जुडऩे से यहां बड़ी संख्या में श्रमिकों को सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल सका है। इसके बाद जयपुर रोड पर नवनिर्मित रेलवे ओवरब्रिज के पास ऑटोमोबाइल पाट्र्स की दुकान चला रहे नवीन जैन के पास पहुंचा और उनसे कस्बे के विकास को लेकर पूछा तो उन्होंने तपाक से जवाब दिया कि कुछ नहीं हुआ। चुनाव में विकास की कोई बात नहीं करता, सिर्फ जात-पात ही सबसे बड़े मुद्दे रह गए हैं। नावां के बाद मैं कुचामन सिटी होते हुए मुस्लिम बाहुल्य सीट डीडवाना में प्रवेश कर गया। डीडवाना के प्रवेश द्वार पर आभा नगरी लिखा था, जिसे वहां नजर आ रहा चौड़ा रास्ता, फ्लाईओवर, उस पर चमचमाती रोड लाइटें और रिफ्लेक्टर कुछ हद सही भी साबित कर रहे थे। एक तरफ सरकार का यह विकास दूसरी ओर तीन तलाक का मसला।
मन में एक ही सवाल बार-बार खुद से कर रहा था कि इनमें से कौन सा मुद्दा भारी है। जैसा कि भाजपा नेताओं का दावा है कि तीन तलाक पर कानून बनाने से मुस्लिम महिलाओं का भला हुआ है, क्या वाकई में ऐसा है, देहात की मुस्लिम महिलाएं ऐसा ही सोचती हैं? इस सोच के साथ नागौर रोड पर बस स्टेंड से पहले एक दुकान के बाहर चार-पांच युवक बैठे दिखे, उनमें से एक-दो ने टोपी भी लगा रखी थी, यह देख मैंने अपनी कार रोकी और उनके बीच जाकर बातचीत शुरू कर दी। असलम खान ने कहा कि आजादी के बाद पिछले पांच साल में इस बार रिकॉर्ड विकास कार्य हुए हैं। यहां गल्र्स कॉलेज खुल गया, हर गली-मोहल्ले में रोड बन गए। इसके बावजूद यह हमारे लिए मुद्दे नहीं हैं, बल्कि मॉब लिंचिंग में गाय की तस्करी के नाम पर हुई मौतें और भेदभाव बड़े मुद्दे हैं। फिर मैंने उनसे तीन तलाक पर कानून बनाने का सवाल किया तो तपाक से इसे गलत कदम बता दिया।
मैंने सोचा चूंकि यह पुरुष है, इसलिए इनका यह मुद्दा नहीं है। इसके बाद कुछ महिलाओं से बात की। कस्बाई और देहाती होने के चलते कुछ जगह तो खुद महिलाओं ने बात करने से मना कर दिया, जबकि कुछ जगह उनके परिजनों ने। शिक्षा से जुड़ी शकीला बी ने बात तो की, लेकिन कैमरे के सामने आने से इनकार कर दिया। उन्होंने पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेण्डर के बढ़ते दाम को बड़ा मुद्दा बताया। तलाक पर कानून के सवाल पर शकीला ने कहा, यह राजनीतिक शिगूफा है। इससे ज्यादा कुछ नहीं है। यह शरीयत और समाज का मसला है, वैसे भी तलाक की संख्या बेहद कम है। इस मसले से समाज खुद ही निपटने में सक्षम है। सरकार को इसकी बजाय महंगाई कम करने और युवाओं को रोजगार देने की ओर ध्यान देना चाहिए।
मैं डीडवाना की पॉश कॉलोनी में पहुंचा, जहां काजिरा उस्मानी मिलीं। वह पहली बार वोट देंगी, उनका कहना है कि धर्म-जाति का इस्तेमाल लड़ाई-झगड़े के लिए होना गलत है। हम जैसे युवाओं के लिए जॉब के नए अवसर पैदा करना और उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज आदि खोलना बड़ा मुद्दा है। रात करीब 11 बजे जायल विधानसभा क्षेत्र के फड़ोद गांव में चाय की एक दुकान पर रुका। वहां चारपाई पर तीन ग्रामीण बतिया रहे थे। मैंने उनसे राजनीति पर चर्चा शुरू की तो एक बोला आप इनसे नहीं मुझसे बात करो। उन्होंने खुद का नाम तेजाराम जाट बताया और ऐसे तथ्य देने लगे जैसे कि वह बहुत बड़े राजनीतिक विश्लेषक हैं। उन्होंने कहा कि जायल में विधायक ने काम पर ध्यान नहीं दिया है। जब उनसे पंचायती राज का उदय नागौर में होने का पूछा तो कहा कि सही है, यही वजह है कि यहां पंचायती राज मजबूत है। हमारी पंचायत का सरपंच एनआरआइ हनुमान जाट है।
Published on:
08 Oct 2018 08:00 am
