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पत्रिका टॉक शो में बोले वक्ता: ‘मां’ ही होती है प्रत्येक परिवार की धूरी, मातृत्व का भाव करता है हर चुनौती को दूर

सांगानेर स्थित सुबोध पीजी गर्ल्स कालेज में शनिवार को मदर्स डे के उपलक्ष्य में 'मातृत्व का भाव' विषय पर पत्रिका टॉक शो का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राओं ने शिरकत की।

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जयपुर

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Abdul Bari

May 13, 2023

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जयपुर। बचपन से ही हमारे सुख दुःख का कोई साथी होता है तो वह है 'मां'। बिना कुछ पूछे हमारे भीतर की खुशी और गम को भांप लेने वाली मां बिना किसी बदले के अजीवन हम पर प्रेम लुटाती है। कुछ ऐसे ही विचार निकलकर सामने आए सांगानेर स्थित सुबोध पीजी गर्ल्स कालेज में, जहां शनिवार को मदर्स डे के उपलक्ष्य में 'मातृत्व का भाव' विषय पर पत्रिका टॉक शो का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राओं ने शिरकत की।

एंटरप्रेन्योर वीमन ऑर्गेनाइजेशन के सहयोग से हुए टॉक शो की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद छात्राओं ने एक संगीतमय प्रस्तुति देकर 'मां' के महत्व को बताया।

मातृत्व का भाव सिखाता है नेतृत्व करना

कॉलेज प्रिंसिपल रीटा जैन ने कहा कि प्रत्येक सफल व्यक्ति के पीछे उसकी मां की मेहनत और संस्कार होते हैं। उन्होंने कहा कि मातृत्व का भाव बेहतर तरीके से नेतृत्व करना सिखाता है। इस दौरान उन्होंने मातृत्व से जुड़े अपने जीवन के अनुभव साझा किए।

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'मां' का बखान कविता सुनाई
एजुकेट गर्ल्स राजस्थान के सुनील शेखर शर्मा ने कहा कि एक मां में अपने बच्चों को पढ़ाने और काबिल बनाने का जो जज्बा देखने को मिलता है, वह और कहीं नहीं है। इस दौरान उन्होंने 'मां' का बखान करती एक कविता सुनाकर सभी से वाहवाही बटोरी।

'मां' ही होती है प्रत्येक परिवार की धूरी

'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान के नोडल अधिकारी जगदीश प्रसाद ने कहा कि एक परिवार में मां ही ऐसी धुरी होती है, जिसके इर्द-गिर्द तमाम परिवार की जरुरतें, शिकायतें और अपेक्षाएं घूमती रहती हैं। इस दौरान उन्होंने बालिका शिक्षा और महिला उत्थान की योजनाओं के बारे में भी बताया।

मातृत्व का भाव करता है चुनौती को दूर

महिला थाना ईस्ट की एसएचओ सीमा पठान ने कहा कि पुलिस जैसी सर्विस में होते हुए एक मां का किरदार भलीभांति निभाना किसी चुनौती से कम नहीं है, लेकिन मातृत्व का भाव हर प्रकार की चुनौती को दूर करता है।

'सबसे पहले 'मां' का नाम याद आता है'

ऑर्गेनाइजेशन की प्रेसीडेंट अलका एम. अग्रवाल ने कहा कि मां के महत्व का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मुसीबत की घड़ी में सबसे पहले 'मां' का नाम याद आता है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए पत्रिका के शैलेन्द्र शर्मा ने कहा कि मातृत्व के बिना प्रत्येक व्यक्ति अधूरा है। कन्वीनर सृष्टि गोयल ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।