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बड़े खर्चों से बच रहे लोग, ठेलों-चाट-पकोड़ों वाले के नोटबंदी का असर नहीं

सप्ताह के अंत में पहले जहां शाम को रेस्टोरेंट में पैर रखने की जगह नहीं मिलती थी, वहां इन दिनों सन्नाटा है। यहां शाम को इक्के-दुक्के परिवार ही भोजन के लिए आ रहे हैं। वहीं, स्ट्रीट फूड स्टॉल की बात करें तो यहां नोटबंदी का असर नहीं पड़ा है।

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सतना

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Ajay Sharma

Nov 25, 2016

people avoid the greater expenses

people avoid the greater expenses

जयपुर. हजार और पांच सौ के पुराने नोट बंद होने का असर लोगों के बाहर जाकर खाने पर भी नजर आ रहा है। सप्ताह के अंत में पहले जहां शाम को रेस्टोरेंट में पैर रखने की जगह नहीं मिलती थी, वहां इन दिनों सन्नाटा है। यहां शाम को इक्के-दुक्के परिवार ही भोजन के लिए आ रहे हैं। वहीं, स्ट्रीट फूड स्टॉल की बात करें तो यहां नोटबंदी का असर नहीं पड़ा है। सबसे बड़ा कारण कम पैसे का खर्च माना जा रहा है। न्यू गेट के पास छोले-भटूले की ठेल लगाने वाले रमेश बताते हैं कि एक-दो दिन ग्राहक जरूर नहीं आए थे, तीसरे दिन सब कुछ सामान्य हो गया है।

गिने चुने लोग ही आते

गौतम मार्ग स्थित एक रेस्टोरेंट के प्रबंधक जीएन शर्मा कहते हैं कि वीकेंड पर शाम पांच बजे से ही लोगों का आना शुरू हो जाता था। अब वीकेंड पर पांच से सात फैमिली ही आ रही हैं। वहीं, नेहरू बाजार स्थित एक रेस्टोरेंट के आेनर यश बताते हैं कि कस्टमर आ तो रहे हैं पर वे चालाकी से एक हजार और पांच सौ के पुराने बंद हो चुके नोट को चलाने का प्रयास करते हैं।

यहां इसलिए भी राहत

शहर की बात क रें तो फूड स्ट्रीट वेंडर की संख्या 15,000 के आस-पास है। इन पर 10 रुपए से लेकर70 रुपए तक का खाने के लिए सामान मिल जाता है। यही वजह है कि इन लोगों पर खास फर्क नहीं पड़ा है। हैरिटेज सिटी थड़ी-ठेला यूनियन के अध्यक्ष बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि शहर मे २० से अधिक चाट मार्केट हैं। यहां पर पहले जैसी ही रौनक है।