
petrol diesel price
जयपुर/ नई दिल्ली। जनता को पेट्रोल आैर डीजल के रेट में कुछ राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन यह कुछ देर बाद ही काफूर हाे गर्इ। दरअसल इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने बुधवार सुबह महानगरों के आंकड़े जारी किए।
आंकड़ाें के अनुसार, जयपुर में पेट्रोल 62 पैसे आैर डीजल 58 पैसे कम हाेना बताया गया, लेकिन कंपनी के आंकड़े ही गलत थे। एेसा तकनीकी खामी की वजह से हुआ था। सुबह करीब 11 बजे कंपनी ने अपने बयान में कहा कि पेट्रोल-डीजल केवल 1 पैसे प्रति लीटर ही सस्ता मिलेगा।
इससे पहले आखिरकार 17 दिन बाद राहत भरी खबर आई है। पेट्रोल-डीज़ल की लगातार बढ़ रही कीमतों पर ब्रेक लग गया है। राजस्थान के बाशिंदे भी दो हफ्ते से भी ज़्यादा समय से पेट्रोल-डीज़ल के दामों के कम होने का इंतज़ार कर रहे थे। दरअसल, कर्नाटक चुनाव संपन्न होने के ठीक बाद से दोनों ही ईंधनों के भाव लगातार बढ़ रहे थे।
राजस्थान के इतिहास में पहली बार है जब पेट्रोल के दाम प्रति लीटर 80 रुपए के पार गए हों। सरकार से पेट्रोल-डीज़ल कीमतों में बढ़ोतरी पर लगाम लगाने की मांग पर प्रदेश के कई जगहों पर धरने-प्रदर्शन के साथ ही चक्काजाम करके विरोध जताया गया। इस बीच सरकार बार-बार आश्वासन देती रही कि ईंधन की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण पाने की कोशिशें जारी हैं जल्द ही इस ओर सकारात्मक नतीजे देखने को मिलेंगे।
कपंनी की आेर से राजधानी जयपुर में पेट्रोल 62 पैसे तक आैर डीज़ल के दाम 58 पैसे प्रति लीटर तक कम हाेना बताया गया था। आपकाे बता दें कि पेट्रोल, डीजल के बढ़ते दाम पर अंकुश की मांग को लेकर यातायात महासंघ के बैनर तले ट्रक, बस, मिनी बस मालिकों ने 11 जून को हाड़ौती बंद करने की चेतावनी दी थी।
यही नहीं ये भी चेताया गया था कि फिर भी मांगे नहीं मानी जातीं तो राजस्थान बंद किया जाएगा। ट्रांसपोर्ट कम्पनी एसोसिएशन, कोटा ट्रक यूनियन, बूंदी व बारां की ट्रक यूनियनों के अध्यक्षों ने मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री के नाम एडीएम प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा था।
सवालों पर घिरते रहे मंत्री
हाल ही में केन्द्र में भाजपा सरकार के चार वर्ष पूरे होने पर उपलब्धि बताने आए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अरुण चतुर्वेदी पेट्रोल-डीजल पर वैट कम करने को लेकर पूृछे गए सवालों पर घिर गए थे। यूपीए सरकार के दौरान पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर भाजपा ने विरोध किया था, इसकी याद दिलाने पर उन्होंने कह दिया 'मुझे इसका पता नहीं है।
चतुर्वेदी ने पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम पर कहा कि यह सरकार के हाथ में नहीं है। अब तेल उत्पाद देश (ओपेक) और अन्तरराष्ट्रीय बाजार से पेट्रोल-डीजल की दरें तय होती है।
फिर भी पेट्रोलियम मंत्री ने इस पर विचार करने का भरोसा दिया है। पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की कोशिश भी चल रही है। केन्द्र सरकार द्वारा राज्यों से पेट्रोल-डीजल से वैट कम करने की अपील पर राज्य सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदम के सवाल पर मंत्री ने कहा कि हर राज्य की अपनी आर्थिक स्थिति होती है।
उसके आधार पर ही सरकार अपनी प्राथमिकता तय करती है। इसके बाद उन्हें याद दिलाया गया कि यूपीए के समय जब भाजपा ने सड़क पर उतर कर विरोध किया था, तब भी तो सरकार की आर्थिक स्थिति कुछ होगी तो मंत्री ने कह दिया कि मुझे नहीं पता।
Updated on:
30 May 2018 12:24 pm
Published on:
30 May 2018 07:35 am
