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कोल्ड ड्रिंक की बोतल में निकला प्लास्टिक, उपभोक्ता आयोग ने कंपनी पर ठोका 2.50 लाख का जुर्माना

खाने-पीने की चीजों में लापरवाही बरतने वाली बड़ी कंपनियों को जैसलमेर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने कड़ा सबक सिखाया है।

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एआई से बनाई गई तस्वीर

जयपुर। खाने-पीने की चीजों में लापरवाही बरतने वाली बड़ी कंपनियों को जैसलमेर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने कड़ा सबक सिखाया है। सीलबंद कोल्ड ड्रिंक की बोतल में प्लास्टिक का टुकड़ा मिलने के मामले में आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित कंपनी और विक्रेताओं पर कुल 2.50 लाख रुपए का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि ब्रांड बड़ा होने का मतलब यह नहीं कि वे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करें। आयोग के अध्यक्ष पवन कुमार ओझा और सदस्य रमेश कुमार गोड की पीठ ने इस मामले में 9 अप्रैल 2026 को फैसला सुनाया। आयोग ने माना कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनी होने के बावजूद उत्पादन और पैकेजिंग की गुणवत्ता में कमी रहना एक गंभीर लापरवाही है।

बोतल में तैरता दिखा प्लास्टिक

पूरा मामला 16 जुलाई 2025 का है। जैसलमेर के डिब्बा पाड़ा निवासी तुषार पुरोहित ने स्थानीय विक्रेता 'शिवम् मार्केटिंग' से कोल्ड ड्रिंक की एक पूरी केरेट खरीदी थी। घर आकर जब उन्होंने बोतलों की जांच की तो वह यह देखकर दंग रह गए कि एक बोतल पूरी तरह सीलबंद थी, लेकिन उसके अंदर प्लास्टिक या पॉलीथिन जैसी कोई बाहरी वस्तु साफ नजर आ रही थी। तुषार ने इसे स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ मानते हुए तुरंत जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

साक्ष्य के रूप में पेश की गई सीलबंद बोतल

सुनवाई के दौरान परिवादी तुषार पुरोहित ने वह संदिग्ध सीलबंद बोतल साक्ष्य के तौर पर आयोग के सामने पेश की। आयोग ने जब बोतल का निरीक्षण करवाया तो उसमें बाहरी पदार्थ होने की पुष्टि हुई। कंपनी की ओर से दी गई दलीलों को खारिज करते हुए आयोग ने कहा कि गुणवत्ता मानक बनाए रखना कंपनी की प्राथमिक जिम्मेदारी है। निरीक्षण में बाहरी पदार्थ मिलने के बाद कंपनी की साख और दावों पर गंभीर सवाल खड़े हुए।

50 हजार रुपए परिवादी को, 2 लाख रुपए कोष में जमा होंगे

आयोग ने अपने फैसले में परिवादी को हुई मानसिक और शारीरिक परेशानी के लिए 40000 रुपए क्षतिपूर्ति राशि देने का आदेश दिया। इसके अलावा, परिवाद लड़ने में हुए खर्च (लीगल एक्सपेंस) के तौर पर 10,000 रुपए अलग से देने को कहा। सबसे बड़ी कार्रवाई के तौर पर आयोग ने उत्पाद की गुणवत्ता में गंभीर खामी को देखते हुए 2 लाख रुपए 'राज्य उपभोक्ता कल्याण कोष' में जमा कराने का ऐतिहासिक आदेश भी दिया।

उपभोक्ताओं के लिए नजीर बनेगा यह फैसला

परिवादी के अधिवक्ता प्रथमेश आचार्य ने बताया कि यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। अक्सर लोग ऐसी लापरवाही को छोटी बात समझकर छोड़ देते हैं, लेकिन कानूनी लड़ाई से ही कंपनियों की जवाबदेही तय होती है। आयोग ने कड़ा संदेश दिया है कि किसी भी उत्पाद के भीतर अशुद्धि या बाहरी पदार्थ मिलना सेवा में गंभीर दोष की श्रेणी में आता है, जिसके लिए भारी जुर्माना भुगतना होगा।

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