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राजस्थान के इस जिले में ‘ रंग-गुलाल ‘ नहीं ‘खून’ से खेली जाती है होली ! इस परंपरा में होते हैं कई लोग घायल

होली की एक बेहद ही खतरनाक प्रथा है डूंगरपुर के भीलूड़ा गांव की।

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जयपुर

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Rajesh

Mar 03, 2018

BLOOD HOLI

BLOOD HOLI

डूंगरपुर ।

रंगो का त्यौहार होली हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। हर जगह की होली मनाने की प्रथा अलग-अलग होती है। कहीं लोग सुखी होली खेलते है तो कहीं लठ मार होली। हर जगह के तौर-तरीके, रीती-रिवाज अलग है। ऐसे ही होली की एक बेहद ही खतरनाक प्रथा है डूंगरपुर के भीलूड़ा गांव की।

इस गांव में होली खेलने का तरीका बिल्कुल ही निराला है, यहां के लोग पत्थरों से होली खेलते है। पत्थरों से होली खेलने की इस परम्परा को काफी पुराना बताया जा रहा है। बरसों से चल रही इस परम्परा में यहां के लोग होली पर एक दूसरे पर पत्थर फेंकते है और होली खेलते है। इस परंपरा के चलते यहां सैंकड़ो लोग घायल हो जाते है। कई लोग गंभीर रूप से घायल हो जाते है, जिन्हें बाद में अस्पताल पहुंचाया जाता है।

सैंकड़ों लोग होते थे शामिल

इस परम्परा से होली खेलने के लिए हर साल सैंकड़ों लोग शामिल होते थे। और घायल होते थे। इस होली को रोकने के लिए प्रशासन लगातार कई सालों से प्रयास कर रहा है। लोगो को समझा-समझा कर प्रशासन होली रोकने के प्रयास कर रहा है जिसका परिणाम भीलूड़ा गांव की होली में इस बार देखने को मिला। इस बार यहां पत्थर फेंकने वाली इस होली में बहुत ही कम लोग शामिल हुए और इस बार यहां होली खेलते वक़्त 8 लोग घायल हुए। हर बार यह आकंड़ा 50 पार रहता था।


प्रशासन व जनप्रतिनिधि कर रहे परम्परा पर रोक लगाने का काम

इस होली के खेलने से पहले प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में लोगों को ग्रामसभा और बैठकों के द्वारा समझाइश का दौर चला। लोगों को समझाया गया की यह परम्परा से होली न खेली जाए और सर्व समाज के साथ मिलकर केवल गुलाल वाली होली खेली जाए। कई ग्रामीणों ने इस पर सहमति जताई और कई इस से नाराज़ लगे व बोल पड़े की यह गांव की बरसों पुरानी परम्परा है इसको बंद करना सही नहीं है।


समझाइश का दिखा असर

रघुनाथजी मंदिर के पास मैदान पर परंपरा को सुचारु रूप से रखने के लिए के लिए कुछ लोग हाथों में पत्थर थाम एक-दूसरे के आमने-सामने हो गए। और एक-दूसरे पर पत्थर बरसाने लगे। गांव के कुछ लोगों ने उन्हें रोकने का प्रयास भी किया, लेकिन उनका जोश इतना था की उन्हें रोकना नाकाम रहा। इस वजह से वहां कुछ समय के लिए पत्थरों से होली खेली गई।

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