
Solar Power Projects India: जयपुर. राजस्थान ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए पीएम-कुसुम योजना के तहत 4 हजार मेगावाट उत्पादन क्षमता का आंकड़ा पार कर लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व और ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के मार्गदर्शन में राज्य ने बीते ढाई वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।
पहले जहां केवल 122 मेगावाट क्षमता के 92 संयंत्र स्थापित थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 1808 संयंत्रों के साथ 4 हजार मेगावाट तक पहुंच गई है। इस उपलब्धि के साथ राजस्थान कुसुम कम्पोनेंट-ए में देश में शीर्ष स्थान पर है, जबकि कम्पोनेंट-सी में गुजरात और महाराष्ट्र के बाद तीसरे स्थान पर है।
पीएम-कुसुम योजना के तहत स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्रों से प्रदेश के करीब 2.62 लाख किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध हो रही है। यह संयंत्र खेतों के पास अनुपजाऊ भूमि पर लगाए जा रहे हैं, जिनकी क्षमता अधिकतम 5 मेगावाट तक होती है।
इससे किसानों को सिंचाई के लिए सस्ती और निरंतर बिजली मिल रही है, वहीं राज्य के विद्युत वितरण निगमों को भी कम लागत में ऊर्जा प्राप्त हो रही है। इससे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता घट रही है और हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है।
केन्द्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा राजस्थान को 10.7 गीगावाट की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें सभी के लिए बिजली खरीद अनुबंध भी हो चुके हैं। इन परियोजनाओं को वर्ष 2026-27 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
राज्य में सौर ऊर्जा विस्तार की रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पहले 1 हजार मेगावाट तक पहुंचने में 48 माह लगे, जबकि 4 हजार मेगावाट तक पहुंचने में केवल ढाई माह का समय लगा। मार्च 2026 में अकेले 543 मेगावाट क्षमता के संयंत्र स्थापित किए गए, जो अब तक का सबसे बड़ा मासिक रिकॉर्ड है।
सरकार ने अक्टूबर 2026 तक शेष 6700 मेगावाट क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। आने वाले समय में हर महीने 500 मेगावाट से 1 गीगावाट तक नई क्षमता जुड़ने की संभावना है, जिससे राजस्थान देश का अग्रणी सौर ऊर्जा राज्य बनता जा रहा है।
Updated on:
24 Apr 2026 09:55 am
Published on:
24 Apr 2026 09:55 am
