
पुलिस कस्टडी में आरोपी। (फोटो- पत्रिका)
जयपुर। यदि, आपने स्कूल में पढऩे वाले अपने बच्चे का बैंक खाता खुलवा रखा है या फिर खाता खुलवाने की कवायद शुरू की है तो सावधान हो जाएं। आपके बच्चे को रुपए का लालच देकर साइबर ठग गिरोह उसका बैंक खाता ठगी की रकम जमा करवाने के लिए उपयोग में ले सकते हैं। राजधानी में ऐसे कई बच्चों के परिजन को पुलिस के नोटिस मिले हैं, जिनके बच्चों के बैंक खातों में ठगी की रकम जमा हुई है। अब परिजन कानूनी विशेषज्ञों की सलाह लेने के लिए भटक रहे हैं।
जयपुर में महेश नगर, आदर्श नगर, सोडाला, मुरलीपुरा और हरमाड़ा निवासी कुछ बच्चों के घर उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश पुलिस के नोटिस पहुंचे तो उनके परिजन के होश उड़ गए। वहीं, बिंदायका थाना पुलिस ने गुरुवार को दो साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश कर 80 बैंक खाते सीज करवाए हैं। इन खातों में करोड़ों रुपए की राशि जमा होना सामने आया है।
पुलिस की एक टीम यह पता लगाने में जुटी है कि, ये बैंक खाते किसके हैं, इनमें कितने यूल अकाउंट स्कूली बच्चों के हैं और कितने गरीब लोगों के हैं। पुलिस ने दो गैंग के सात लोग गिरतार किए हैं।
डीसीपी (वेस्ट) अमित कुमार ने बताया कि, बिंदायका थाना पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग ऐप पर क्रिकेट सट्टा लगवाने के मामले में पाली निवासी चक्रवर्ती सिंह चौहान, भूपेंद्र सिंह, उदयपुर निवासी प्रतीक सुथार को गिरतार किया। जबकि दूसरे मामले में नाथद्वारा निवासी भावेश शर्मा, मूलत: चित्तौड़गढ़ निवासी हेमेंद्र सिंह चौहान, सलूबर निवासी कमलेश पटेल और उदयपुर निवासी सोहन सिंह को गिरफ्तार किया। दोनों गैंग से 47 मोबाइल, 7 लैपटॉप सहित अन्य सामान जब्त किया गया। वहीं 80 बैंक खाते फ्रीज करवाए गए। गिरफ्तार सभी आरोपी गांधी पथ स्थित वर्धमान संपदा में रह रहे थे।
साइबर डीजी हेमंत प्रियदर्शी ने सभी पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि लालच में आकर यूल अकाउंट खुलवाने से बचने के जागरूकता संबंधी होर्डिंग्स, पंपलेट्स को सार्वजनिक स्थानों, थानों और सरकारी दफ्तरों में लगवाएं।
अपने बच्चे के अकाउंट की जांच करते रहें और संदेह होने पर बच्चे को अपराध में फंसाने के संदर्भ में मुख्य आरोपी के खिलाफ पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाएं। मुख्य आरोपी और बच्चे के बीच हुई वार्ता को पुलिस को देकर असली गुनहगार को पकड़ा के ठगी की गई रकम को बरामद करवाने में पुलिस की मदद करें। बैंक खाता खुलवाने में जिस व्यक्ति ने बच्चे की मदद की है, उसकी जानकारी भी पुलिस को दें। खाते में जमा आपेक्षित राशि पुलिस या न्यायालय को सुपुर्द कर दें।
-मोहित खंडेलवाल, अधिवक्ता, हाईकोर्ट
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Published on:
23 May 2025 07:31 am
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