
जयपुर . बीते 2 दिन से धूलभरी तेज हवाओं ने जनजीवन को खासा प्रभावित किया है। वाहनों व अन्य कारणों से बढ़ते धुआं के बीच तेज हवा से विषैले तत्व श्वास संग शरीर में जा रहे हैं। बीते 2 दिन में प्रदूषण स्तर खतरनाक स्तर पर देखा गया है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के राजवायु ऐप के आंकड़ों के अनुसार मंगलवार सुबह 7 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) बीते 24 घंटों में औसत 500 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर पहुंच गया। एक्यूआइ 500 माइक्रोग्राम से अधिक पहुंचना बहुत खराब स्थिति होती है। 301 और 400 के बीच वायु की गुणवत्ता को बेहद खराब श्रेणी में रखा जाता है। इस स्थिति में लंबे समय तक रहने पर श्वास लेने में समस्या हो सकती है।
गम्भीर स्थिति
आंकड़ों के अनुसार शहर में सी-स्कीम, शास्त्रीनगर, सेठी कॉलोनी सहित अन्य पॉश इलाकों में भी पीएम 10 और 2.5 की मात्रा सर्वाधिक देखने को मिल रही है। यह चिंताजनक विषय है।
बाहर जाने से बचें
अस्थमा भवन के डायरेक्टर डॉ. वीरेन्द्र सिंह का कहना है कि प्रदूषण खासतौर पर पेट्रोल-डीजल के धुंआ, तेज हवा, लकड़ी-चूल्हा जलाने, फैक्ट्रियों के धुएं से बढ़ता है। पीएम 2.5 के स्तर में जो हानिकारक तत्व होते हैं वे सीधे सांस के जरिए शरीर में जाते हैं। पीएम 10 के स्तर में तत्व नाक, गले में रुक जाते हैं। तेज हवा के दौरान फेफड़ों की बीमारी से ग्रस्त लोग मॉर्निंग वॉक पर और बाहर जाने से बचें।
अजयकुमार गुप्ता, सदस्य सचिव, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने कहा कि आंधी के चलते धूल कण ज्यादा हैं, इसी कारण वातावरण में पीएम- 10 की मात्रा मानकों से काफी अधिक है। ऐसे समय में बीमार बच्चे और वृद्धजनों को ज्यादा सावधानी रखने की आवश्यकता है। उन्हें अनावश्यक बाहर निकलने से बचना चाहिए।
क्या है पीएम
पर्टिकुलर मैटर हवाओं में मौजूद धूल कण। जिन्हें हम सामान्य रूप से हवा में देख नहीं पाते वह पीएम 2.5 होती है। जैसे बंद कमरे में सूर्य की रोशनी में धूल कण लड़ते हुए दिखाई देते हैं। पीएम 10 मोटे धूल कण।
इतनी तेज हवा
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक शहर में रेतीले तूफान के कारण अधिकतम 55 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चली। सुबह 4 बजे हवा की गति प्रति घंटे 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंची।
Published on:
09 May 2018 01:01 pm
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