
प्रदेश में 50 लाख किसान, 30 लाख ने किया आवेदन, एक को भी नहीं मिला योजना का लाभ
जयपुर। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में जिला कलक्टर और विभागीय अधिकारियों की लापरवाही केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी योजना पर भारी पड़ रही है। योजना में पात्रता तय करने के लिए पटवारी और तहसीलदार से जो फॉर्म तस्दीक होकर कलक्टर के पास पंहुचे हैं वे जस के तस पड़े हैं। कलक्टर को ये खुद पता नहीं है कि पात्रता की जो शर्त तय की गई है है उसकी पालना हुई है या नहीं। ऐसे में 30 लाख आवेदन होने के बाद भी अभी तक प्रदेश के एक भी किसान को योजना का लाभ नहीं मिला है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार योजना में पात्र किसानों की संख्या करीब 50 लाख है। केंद्र की इस योजना के लिए प्रदेश सरकार ने 17 फरवरी को पोर्टल लॉंन्च किया था। पोर्टल पर अभी तक करीब 30 लाख से अधिक किसान आवेदन कर चुके हैं। आवेदन करने वाले लघु व सीमांत किसानों को सालाना छह हजार रुपए केंद्र की ओर से मिलेंगे। यह सहायता तीन किश्तों में मिलेगी। पहली किश्त में दो हजार रुपए मिलने हैं। जिन किसानों ने आवेदन किया है उसकी तस्दीक पटवारी और तहसीलदार करेंगे। इसके बाद कलक्टर उसे अंतरिम रूप देकर केंद्र को भेज देंगे।
32 हजार आवेदनों की आधूरी तस्दीक
अभी केवल 32 हजार किसानों के आवेदन की आधी अधूरी तस्दीक हो पाई है। जबकि पटवारी ने अपने स्तर पर छह हजार आवेदन निरस्त कर दिया है। पात्र माने गए आवेदनों में से 19 हजार आवेदन को ई-हस्ताक्षर कर तहसीलदारों को भेजे गए हैं। तहसीलदार ने भी इनमें से भी 30 को खारिज कर दिया है। ई हस्ताक्षर कर 4,326 आवेदन जिला कलक्टरों को भेजे हैं जिसकी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है।
314 तहसीलों में से सिर्फ 76 ऑनलाइन
आवेदनों की तस्दीक करने के लिए सहकारी विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। इसके लिए विभाग ने जिला कलक्टरों से संपर्क किया तो उन्होंने अपनी समस्या गिना दी। योजना में केवल वे ही किसान पात्र हैं जो लघु और सीमांत की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में इस तथ्य की पुष्टि करना मुश्किल है कि आवेदक के पास किसी जिले या तहसील में और जमीन तो नहीं है। प्रदेश में कुल 314 तहसील हैं जिनमें सिर्फ 76 ऑनलाइन है। ऐसे में रेवन्यू रिकॉर्ड की राज्य स्तर पर ऑन लाइन तस्दीक करने की व्यवस्था नहीं है।
Published on:
24 Mar 2019 07:40 am
