
Pratap Singh Khachariyawas and Ashok Gehlot - File Pics
राजस्थान में चीनी की बढ़ती कीमतों और इथेनॉल नीति को लेकर राजनीति गरमा गई है। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने केंद्र और राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि इथेनॉल सेक्टर में हो रहे कथित भ्रष्टाचार और अनियंत्रित नीति के कारण महज 1 महीने के भीतर चीनी के दाम 25 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ चुके हैं।
जयपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए खाचरियावास ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि इतिहास गवाह है कि जब भी देश में चीनी के दाम बढ़े हैं, तब-तब सरकारें गिरी हैं और यही चीनी का मुद्दा आने वाले समय में बीजेपी के पतन का कारण बनेगा।
गौरतलब है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग और गन्ने के डायवर्जन को लेकर राजस्थान कांग्रेस के नेता लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। खाचरियावास के इस बयान से ठीक एक दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की अदूरदर्शिता पर सवाल खड़े किए थे।
प्रताप सिंह खाचरियावास ने आरोप लगाया कि इथेनॉल नीति का फायदा उठाकर गन्ने की सप्लाई को चीनी उत्पादन से हटाकर बायो-फ्यूल की तरफ मोड़ा जा रहा है, जिससे बाजार में चीनी का कृत्रिम संकट पैदा हो गया है।
उन्होंने कहा, "इथेनॉल के मामले में पूरा खेल चल रहा है और इससे कमाई की जा रही है, जबकि देश में चीनी के नाम पर आम जनता को बर्बाद कर दिया गया है। लोग महंगाई के कारण परेशान हैं। लेकिन मेरी बात याद रखिएगा, जब-जब चीनी के दाम बढ़े हैं, सरकारें गिरी हैं। बीजेपी का उलटा काउंटडाउन शुरू हो चुका है।"
खाचरियावास से पहले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी एक बयान जारी कर केंद्र सरकार की इथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी पर गंभीर सवाल उठाए थे। गहलोत ने आंकड़े देते हुए कहा था कि मात्र 15 दिनों के भीतर खुदरा बाजार में चीनी 14 से 17 रुपये प्रति किलो तक महंगी हो गई है।
गहलोत के अनुसार, बिना पर्याप्त तैयारी के पेट्रोल में उच्च स्तर पर इथेनॉल मिलाने के फैसले से दोहरी मार पड़ रही है—एक तरफ गन्ने के डायवर्जन से चीनी महंगी हो रही है और दूसरी तरफ E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों के इंजन खराब हो रहे हैं और माइलेज घट रहा है।
राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इसे बड़े जनमुद्दे के रूप में भुनाने जा रही है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि नीतिगत निर्णयों की वजह से आम परिवारों का रसोई का बजट बिगड़ चुका है।
दूसरी तरफ, सत्तारूढ़ दल बीजेपी की ओर से इस मामले पर कहा जा रहा है कि इथेनॉल नीति देश को हरित ऊर्जा और आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसे विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहा है।
Updated on:
24 Aug 2026 09:37 am
Published on:
24 Aug 2026 09:22 am
