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‘राजस्थान के पंचायत-निकाय चुनावों में दिखेगा प्रशांत किशोर की जीत का असर’, पूर्व मंत्री के दावे से सियासी खलबली!

Rajasthan Politics 2026: प्रशांत किशोर की बांकीपुर जीत और दतिया उपचुनाव का हवाला देकर प्रताप सिंह खाचरियावास का बड़ा दावा! जानिए राजस्थान निकाय और पंचायत चुनाव से पहले कांग्रेस की नई रणनीति और बीजेपी पर हमले का पूरा सच।
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Prashant Kishor - File PIC

राजस्थान में आगामी पंचायती राज और नगरीय निकाय चुनावों की तारीखें करीब आते ही राज्य का सियासी तापमान गरमाने लगा है। इस बीच बिहार और मध्य प्रदेश में हुए उपचुनाव के नतीजों से कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। विरोधी दलों के नेताओं का मानना है कि देश के हालिया चुनावी नतीजों, विशेषकर बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) की ऐतिहासिक जीत और मध्य प्रदेश के दतिया में कांग्रेस के प्रदर्शन ने संकेत दे दिए हैं, कि जनता के बीच बीजेपी को लेकर भयंकर असंतोष है।

'राजस्थान की जनता भी मन बना चुकी है'

राजधानी जयपुर में पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए राष्ट्रीय संदर्भों को सीधे राजस्थान के ग्रामीण व स्थानीय निकाय चुनावों से जोड़ते हुए बड़ा बयान दिया।

खाचरियावास ने कहा कि पटना की बांकीपुर सीट बीजेपी का 30 साल पुराना और सबसे मजबूत किला मानी जाती थी। वहां जिस तरह प्रशांत किशोर ने बीजेपी प्रत्याशी को शिकस्त दी, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि जनता अब बीजेपी के खोखले वादों से ऊब चुकी है और एक बदलाव चाहती है।

उन्होंने मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की बढ़त व जीत का उदाहरण देते हुए कहा कि हिंदी भाषी राज्यों में बीजेपी के खिलाफ जनाक्रोश चरम पर है।

राजस्थान में कांग्रेस को उम्मीदें

खाचरियावास ने कहा, "हमें राजस्थान की जनता से पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में भारी उम्मीदें हैं। प्रदेश का किसान, युवा, व्यापारी और आम नागरिक भजनलाल सरकार की विफलताओं से परेशान हैं। यह चुनाव राजस्थान में कांग्रेस की वापसी का मील का पत्थर साबित होगा।"

राष्ट्रीय नतीजों का सियासी गणित

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रताप सिंह खाचरियावास द्वारा प्रशांत किशोर की जीत को राजस्थान के स्थानीय चुनावों से जोड़ना एक सोची-समझी रणनीतिक चाल है।

'अजेय बीजेपी' का परसेप्शन तोड़ना: बीजेपी की शहरी क्षेत्रों और पारंपरिक गढ़ों पर पकड़ को लेकर जो छवि बनी थी, उसे बांकीपुर के नतीजे के जरिए चुनौती दी जा रही है।

कार्यकर्ताओं में उत्साह का संचार: पंचायत और निकाय चुनावों से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी की हार को बड़े पैमाने पर प्रचारित किया जा रहा है।

स्थानीय मुद्दों की ब्रांडिंग: राजस्थान में बिजली, पानी, सड़क और बेरोजगारी जैसे जमीनी मुद्दों पर गिरती भजनलाल शर्मा सरकार के खिलाफ माहौल तैयार करना।

क्या वाकई दिखेगा 'पीके इफेक्ट' और राष्ट्रीय नतीजों का असर?

बिहार में प्रशांत किशोर (PK) ने तीन दशकों से बीजेपी के कब्जे वाली सीट पर अपनी पहली चुनावी जीत दर्ज कर पूरे देश के राजनीतिक गलियारों को चौंका दिया है। हालांकि, सत्तारूढ़ बीजेपी का तर्क है कि उपचुनावों और स्थानीय निकायों के समीकरण अलग होते हैं और राजस्थान की जनता बीजेपी सरकार के विकास कार्यों पर मुहर लगाएगी।

लेकिन कांग्रेस खेमे में जिस तरह प्रशांत किशोर की जीत को बीजेपी की कमजोरी के प्रतीक के रूप में पेश किया जा रहा है, उसने राजस्थान के आगामी पंचायत और निकाय चुनावों की जंग को बेहद दिलचस्प बना दिया है।

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