
जयपुर।
राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद इन दिनों राजस्थान के दो दिवसीय प्रवास पर हैं। उनके साथ उनकी धर्मपत्नी सविता कोविंद भी आईं हुईं हैं। कोविंद दंपत्ति की एक साथ उपस्थिति आमतौर पर बहुत कम ही देखने को मिलती है।
'राष्ट्रपति' की सफलता में है अहम् भूमिका
जैसे हर सफल पुरुष के पीछे किसी महिला का हाथ होता है, ठीक वैसे ही राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की सफलता के पीछे भी उनकी धर्मपत्नी सविता कोविंद की अहम भूमिका रही है। सविता कोविंद 25 जुलाई 2017 से भारत की पहली महिला हैं। इससे पहले, पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की पत्नी सुवरा मुखर्जी को प्रथम महिला होने का गौरव हासिल था। हालांकि सुवारा मुखर्जी का निधन 18 अगस्त 2015 को हो गया था।
सविता कोविंद के माता-पिता मूल रूप से पाकिस्तान में लाहौर में रहते थे। विभाजन के बाद वे भारत आ गए और यहां दिल्ली के लाजपत नगर में बस गए। उन्होंने महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) में बतौर टेलीफोन ऑपरेटर काम किया। ये उनके करियर की पहली जॉब थी। धीरे-धीरे उनकी तरक्की हुई और उन्हें चीफ सेक्शन सुपरवाईज़र के पद पर पदोन्नत किया गया। लेकिन साल 2005 में, उन्होंने सेवा से एक स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली।
30 मई 1974 को उनका विवाह राम नाथ कोविंद से हो गया। उनके एक बेटे और बेटी हैं।
कभी नहीं सोचा था पति राष्ट्रपति बनेंगे
रामनाथ कोविंद के देश के राष्ट्रपति बनने के बाद पत्नी सविता कोविंद ने प्रतिक्रिया में कहा था कि 'मैंने कभी नहीं सोचा था कि वह राष्ट्रपति बन जाएंगे।' उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान कहा, 'बिहार का राज्यपाल रहते हुए उन्होंने इस बड़ी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया था। वह देश का सबसे बड़ा पद संभालेंगे, इसलिए अब अलग ही अहसास हो रहा है। राष्ट्रपति बनने के बाद भी उनमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
वहीं, बेटी स्वाति कोविंद का भी कहना था कि वे अपने पिता के मानवीय गुणों के कारण उनका बहुत आदर करतीं हैं। वह एक स्नेहिल पिता ही नहीं, सबका ख्याल रखने वाले इंसान भी हैं।
Published on:
14 May 2018 10:07 am

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