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लेवाल-देवाल मालामाल, प्रॉपर्टी डीलर कंगाल….ठग गिरोह जमीन मालिक के साथ मिलकर ऐसे कर रहे थे ठगी

Property Fraud : विश्वकर्मा थाना पुलिस ने एक ठग गिरोह का पर्दाफाश कर 6 जालसाजों को गिरफ्तार किया है। गिरोह बाहरी बनकर स्थानीय प्रॉपर्टी डीलर से मिलकर विवाद रहित भूमि खरीदने का झांसा देता। फिर अपनी पसंद की जमीन बताकर उसकी तस्दीक कर खरीदने का इकरारनामा करता।

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जयपुर

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Supriya Rani

Apr 11, 2024

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जयपुर. विश्वकर्मा थाना पुलिस ने एक ठग गिरोह का पर्दाफाश कर 6 जालसाजों को गिरफ्तार किया है। गिरोह बाहरी बनकर स्थानीय प्रॉपर्टी डीलर से मिलकर विवाद रहित भूमि खरीदने का झांसा देता। फिर अपनी पसंद की जमीन बताकर उसकी तस्दीक कर खरीदने का इकरारनामा करता। प्रॉपर्टी डीलर को मोटा मुनाफा कमाने का झांसा देकर उससे ही भूमि मालिक को साईपेटे लाखों रुपए दिला देते। इसके बाद मूल इकरारनामा लेकर भाग जाते। भूमि मालिक मूल इकरारनामा की मांग करते हुए साईपेटे ली गई रकम नहीं लौटाता। इस तरह गिरोह ने अलग-अलग प्रॉपर्टी डीलर से साईपेटे 2.22 करोड़़ रुपए ठग लिए।

डीसीपी अमित कुमार ने बताया कि गिरोह के पास से परिवादी के अलावा अन्य चार प्रॉपर्टी डीलर से ठगी किए जाने वाले मूल इकरारनामा बरामद किए हैं। डीसीपी अमित ने बताया कि नई दिल्ली निवासी अनिल शर्मा, फिरोज खान, उत्तर प्रदेश निवासी पंकज शुक्ला, नरेन्द्र कुमार धोबी, मूलत: सीकर के जाजोद हाल मध्यप्रदेश में चतरपुरा निवासी राजेन्द्र प्रसाद शर्मा व राजेन्द्र का भाई रामगोपाल शर्मा को गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पीडि़त प्रॉपर्टी डीलर ने चौमूं थाने में मामला दर्ज करवाया था और मामले की जांच विश्वकर्मा थानाधिकारी राजेन्द्र कुमार शर्मा को सौंपी गई थी। गैंग के खिलाफ ठगी के 6 मुदकमे दर्ज हैं।



डीसीपी अमित ने बताया कि राजेन्द्र प्रसाद शर्मा व रामावतार शर्मा की शाहपुरा में दिल्ली हाईवे पर जमीन है और सीकर स्थित गांव में पुश्तैनी जमीन है। आरोपी दोनों भाई गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर जयपुर शहर, ग्रामीण, सीकर, नीमकाथाना, दिल्ली हाईवे व अन्य राज्यों में प्रॉपर्टी डीलरों को चिह्नित करते। इसके बाद गिरोह के अन्य सदस्य बाहरी होने का हवाला दे प्रॉपर्टी डीलर को मुख्य हाईवे के नजदीक जमीन खरीदने की इच्छा जताते। गिरोह के सदस्य ही दोनों भाइयों की जमीन पसंद आना बताते। लग्जरी होटल में मुलाकात करते, जिससे प्रॉपर्टी डीलर को संदेह न हो। बाद में प्रॉपर्टी डीलर दोनों भाइयों से संपर्क करता तो उसे वे बाजार भाव से कुछ कम कीमत में जमीन बेचने को तैयार हो जाते। गिरोह के सदस्य इकरारनामा के नाम पर कुछ रकम खुद देते और मोटी रकम प्रॉपर्टी डीलर से दोनों भाइयों को दिला देते। शेष राशि गिरोह के अन्य सदस्य (कंपनी के मालिक) को दस्तावेज दिखाने पर देने की बात कहकर मूल इकरारनामा खुद ले लेते। फोटो प्रति प्रॉपर्टी डीलर को दे देते। प्रॉपर्टी डीलर दोनों भाइयों से सौदा रद्द होने का हवाला दे रकम वापस मांगते, लेकिन दोनों भाई मूल इकरारनामा नहीं होने का हवाला दे रकम हड़प लेते। बाद में गिरोह के सदस्यों के साथ ठगी की रकम को बांट लेते। इसी प्रकार चौमूं के पीडि़त से दोनों भाइयों को 25 लाख रुपयों को गिरोह के सदस्यों के साथ बांट लिए थे।

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