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अनूठी मुहिम: आप मुझे अपना दर्द सुनाओ, मैं आपको दूंगी 20 रुपए

Real Life Inspirational Story: आप मुझे अपनी कहानी सुनाओ, मैं आपको 20 रुपए दूंगी। सड़क पर एकाएक कोई आपके सामने आकर यह कहे तो चौंकना तय है। शहर में पिछले एक साल से हाथ में पोस्टर लिए एक युवती ऐसी ही मुहिम चला रही है। उद्देश्य शहर के मानसिक रोगी, तनाव से जूझ रहे लोगों और अकेलेपन की तकलीफ झेल रहे इंसानों की मदद करना है।

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जयपुर. Motivational Story: आप मुझे अपनी कहानी सुनाओ, मैं आपको 20 रुपए दूंगी। सड़क पर एकाएक कोई आपके सामने आकर यह कहे तो चौंकना तय है। शहर में पिछले एक साल से हाथ में पोस्टर लिए एक युवती ऐसी ही मुहिम चला रही है। उद्देश्य शहर के मानसिक रोगी, तनाव से जूझ रहे लोगों और अकेलेपन की तकलीफ झेल रहे इंसानों की मदद करना है। इस अनूठी मुहिम के पीछे है जयपुर की मेंटल हेल्थ एक्टिविस्ट प्रियंका जो रोजाना वैशाली नगर और मालवीय नगर में 2 से 3 घंटे सड़क पर पोस्टर लिए खड़ी रहती है। प्रियंका के अनुसार जब उन्होंने यह मुहिम छेड़ी तो लोगों ने ज्यादा रिएक्ट नहीं किया लेकिन अब पॉजिटिव रेस्पॉन्स मिल रहा है। इस मुहिम से वह लोगों की तकलीफ कम करना चाहती है। उनकी यही कोशिश रहती है कि वह लोगों की तकलीफ सुने और निजात दिलवाए। इस मुहिम के जरिये वह अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मदद कर चुकी है।

उनके अनुसार आज के दौर में डिप्रेशन, एंजाइटी और तनाव जैसी समस्याएं आम हैं। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इनफार्मेशन (एनसीबीआई) की रिपोर्ट के अनुसार भी भारत में 30 फीसदी से ज्यादा लोग तनाव, डिप्रेशन से ग्रसित हैं।
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यों हुआ शुरुआत
साइकोलॉजी की स्टूडेंट प्रियंका के मुताबिक उन्होंने बारह साल ऐसा दर्द भोगा जिसको किसी को बता भी न सकी। एसएलई-लुपस नामक दुर्लभ बीमारी के कारण सांस लेने में तकलीफ, डिप्रेशन, लंग्स में संक्रमण, अल्सर, हाथ-पैरों में सूजन जैसी रोगों से जूझती रही। खास बात यह थी कि डॉक्टर भी रोग और उसके असली कारण को पकड़ नहीं पाए। तब मैं अपनी तकलीफ जानना चाहती थी। जो कुछ मेरे साथ हो रहा है उसे लोगों को बताना चाहती थी। लेकिन घुटन के आगे शब्द बाहर ही नहीं आ पाते थे। वह बुरा दौर जब बीता तब अहसास हुआ कि जो मैंने भोगा है उससे बहुत से लोग गुजरते होंगे तो क्यों न उनकी मदद की जाए। इसी सोच के साथ मैंने लोगों की मदद करने की ठानी।
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यह तो हिम्मत का रिवॉर्ड है
प्रियंका के अनुसार मानसिक रूप से अस्वस्थ, परेशान और अकेलेपन से जूझ रहे लोगों की तकलीफ सुनने के बाद वह उन्हें बीस रुपए देती हैं। उनका मानना है कि अपनी पीड़ा बताने के लिए हिम्मत चाहिए। लोग विश्वास और हिम्मत करके उन्हें अपनी समस्या बताते हैं। प्रियंका ने बताया कि ज्यादातर लोग पैसे स्वीकार नहीं करते। पोस्टर मुहिम के अलावा ऑनलाइन सत्र और सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों की मदद कर रही हैं।

मदद लेने वाले ये बोले
- मानसिक स्वास्थ्य पहले से बेहतर हुआ है।
- थैरेपी सत्र से तनाव दूर करने में मदद मिली।
- अब दवाइयों की भी जरूरत नहीं।