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JAIPUR: पंप मालिकों के ‘तुगलकी फरमान’, बिना सरकारी आदेश पोस्टर चस्पा, DSO बोले- ये कौन है तय करने वाले, किसको कितनी LPG GAS बेचनी है, होगी कार्रवाई

कई पंप मालिकों ने अपनी मर्जी से नियम बनाकर दीवारों और मशीनों पर पोस्टर चस्पा कर दिए हैं।

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मनीष चतुर्वेदी

जयपुर। राजधानी में इन दिनों एलपीजी गैस की किल्लत क्या हुई, कई पंप संचालकों ने अपनी 'समानांतर सरकार' चलानी शुरू कर दी है। कई पंप संचालक खुद जज बन गए है। शहर के कई पंपों पर न तो सरकार का खौफ दिख रहा है और न ही प्रशासन का नियंत्रण। आलम यह है कि कई पंप मालिकों ने अपनी मर्जी से नियम बनाकर दीवारों और मशीनों पर पोस्टर चस्पा कर दिए हैं। इन पोस्टरों पर साफ लिखा है।'ऑटो में 250 और कार में 500 रुपए से ज्यादा की गैस नहीं भरी जाएगी'। बिना किसी सरकारी आदेश के लागू की गई इस 'राशनिंग' ने जनता की नाक में दम कर दिया है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी अब तक गहरी नींद में सोए हुए थे।

चस्पा कर दिए 'तुगलकी फरमान', जनता परेशान

राजधानी के प्रमुख एलपीजी स्टेशनों पर पहुंचने वाले वाहन चालकों को इन दिनों पहले तेल नहीं, बल्कि 'चेतावनी भरे पोस्टर' दिख रहे हैं। कई पंप वालों ने खुद ही जज और खुद ही सरकार बनते हुए कोटा फिक्स कर दिया है। घंटों लाइन में लगने के बाद जब चालक का नंबर आता है, तो सेल्समैन हाथ झाड़ लेता है। दलील दी जाती है कि पीछे से सप्लाई कम है, इसलिए सबको थोड़ी-थोड़ी गैस दे रहे हैं। सवाल यह है कि क्या किसी पंप संचालक को यह अधिकार है कि वह ग्राहक की जरूरत को नजरअंदाज कर अपनी मर्जी का कोटा थोप सके?

500 की गैस में उदयपुर कैसे जाएगा कोई

जिला रसद अधिकारी प्रियव्रत सिंह चारण से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने दो टूक शब्दों में इसे 'गलत' करार दिया। पत्रिका ने जब सवाल किया कि अगर किसी को जयपुर से उदयपुर जाना हो और पंप वाला उसे केवल 500 रुपए की गैस दे, तो सफर कैसे पूरा होगा? इस पर डीएसओ ने कहा, "सरकार का ऐसा कोई नियम नहीं है कि गैस की बिक्री को सीमित किया जाए। यह पंप वालों की सरासर मनमानी है। गाड़ी मालिक की मर्जी है कि वह कितनी गैस खरीदना चाहता है। ऐसे पोस्टरों को तुरंत हटवाया जाएगा और संबंधित पंप मालिकों पर सख्त एक्शन होगा।"

कालाबाजारी: 71 वाली गैस 100 तक पहुंची

शहर में खेल सिर्फ पोस्टरों तक सीमित नहीं है, बल्कि कीमतों में भी भारी 'लूट' मची है। एक तरफ इंडियन ऑयल के पंपों पर दर 70.96 रुपए प्रति लीटर है, तो वहीं निजी पंपों पर 99.95 यानी करीब 100 रुपए लीटर तक वसूली की जा रही है। पोस्टर लगाकर लिमिट तय करने के पीछे का एक बड़ा खेल कालाबाजारी भी माना जा रहा है। प्रशासन की सख्ती की भनक लगते ही कई पंप संचालकों ने डर के मारे पंप ही बंद कर दिए हैं।

5 घंटे लाइन और सिर्फ 250 की गैस, फूटा चालकों का गुस्सा

ऑटो रिक्शा यूनियन इस तानाशाही के खिलाफ सबसे ज्यादा मुखर है। यूनियन अध्यक्ष कुलदीप सिंह ने कहा कि एक ऑटो चालक सुबह 4 बजे लाइन में लगता है, 5 घंटे बाद उसका नंबर आता है तो उसे 250 रुपए की गैस थमा दी जाती है। 250 रुपए की गैस में ऑटो कितने किलोमीटर चलेगा? क्या हम पूरे दिन सिर्फ गैस की लाइन में ही लगे रहें? पंप संचालक सरकार को आंख दिखा रहे हैं और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।"

आंदोलन की चेतावनी, जाम होगा जयपुर

ऑटो और टैक्सी यूनियन ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। यूनियन का कहना है कि अगर रसद विभाग ने तुरंत इन अवैध पोस्टरों को नहीं हटवाया और गैस की सप्लाई सुचारू कर मनमानी रेट पर लगाम नहीं लगाई तो राजधानी की सड़कों पर चक्का जाम किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि इस अव्यवस्था से पैदा होने वाली कानून-व्यवस्था की स्थिति की पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी। फिलहाल रसद विभाग ने टीम गठित कर मॉनिटरिंग और मुकदमे दर्ज करने का दावा किया है।